यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: परिवहन, किसानों, स्वास्थ्य और शहरी विकास को मिली नई दिशा

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिपरिषद की बैठक में 25 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 24 को मंजूरी दे दी गई। बैठक में सार्वजनिक परिवहन, किसानों के हित, स्वास्थ्य सेवाओं, जेल सुधार, शहरी विकास और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

प्रदेश के 17 नगर निगमों तथा नोएडा-जेवर क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाने के लिए 1725 नई विद्युत बसों के संचालन को मंजूरी दी गई। इनमें 725 बसें 9 मीटर तथा 1000 बसें 12 मीटर लंबाई की होंगी। इस योजना पर कुल 1852 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे लोगों को सुगम, सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त परिवहन सुविधा मिलेगी तथा हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

किसानों को राहत देते हुए सरकार ने मक्का के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 175 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि कर इसे 2225 रुपये से बढ़ाकर 2400 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। साथ ही मक्का खरीद का लक्ष्य 25 हजार मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है और किसानों को भुगतान 48 घंटे के भीतर करने की व्यवस्था की गई है।

न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकारी अधिवक्ताओं के मानदेय और बहस शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। जिला शासकीय अधिवक्ताओं का मासिक मानदेय 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 14 हजार रुपये तथा प्रति सुनवाई शुल्क 1650 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया गया है।

प्रदेश की जेलों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए मुरादाबाद, ललितपुर, औरैया, कानपुर नगर तथा भदोही में पांच नई जेलों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देशों के अनुरूप बंदियों की मृत्यु पर मुआवजा देने का भी निर्णय लिया गया है।

व्यावसायिक वाहन स्वामियों को राहत देते हुए बकाया कर निस्तारण के लिए एकमुश्त समाधान योजना लागू करने का फैसला लिया गया है। इसके तहत मूल कर पर 35 प्रतिशत तक छूट और जुर्माने की पूरी राशि माफ की जाएगी।

राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में नया उप-पंजीयक कार्यालय स्थापित करने को भी मंजूरी दी गई है, जिससे बढ़ते पंजीकरण कार्यों का दबाव कम होगा और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

प्रदेश को अर्धचालक निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने के उद्देश्य से अर्धचालक नीति में संशोधन को भी स्वीकृति दी गई है। सरकार का लक्ष्य वैश्विक निवेश आकर्षित कर प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देना है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कानपुर के पांडुनगर कर्मचारी राज्य बीमा अस्पताल को चिकित्सा महाविद्यालय और अति विशिष्ट चिकित्सालय के रूप में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। लगभग 700 करोड़ रुपये की इस परियोजना से चिकित्सा सुविधाओं और चिकित्सा शिक्षा दोनों को लाभ मिलेगा।

मंडी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने के लिए शुल्क निर्धारण और प्रवेश पत्र व्यवस्था को पूर्णतः ऑनलाइन करने का निर्णय लिया गया है। इससे व्यापारियों और किसानों को सुविधा मिलेगी तथा विवादों में कमी आएगी।

इसके अतिरिक्त दंत चिकित्सकों के सेवा संवर्ग में संशोधन कर उन्हें भी निदेशक पद तक पदोन्नति का अवसर प्रदान किया गया है। वहीं झांसी में गो आश्रय स्थल और पशु चिकित्सालय स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है।

शहरी विस्तार को गति देने के लिए आगरा, बरेली और प्रयागराज में नए शहरों के विकास हेतु आर्थिक सहायता देने का भी निर्णय लिया गया है।

इन फैसलों से स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार ने परिवहन, कृषि, स्वास्थ्य, न्यायिक व्यवस्था, शहरी विकास और प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता देते हुए व्यापक जनहित के निर्णय लिए हैं।

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