लखनऊ, 24 मई 2026 (यूएनएस)। लखनऊ नगर निगम की राजनीति में रविवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब लंबे समय से विवादों में घिरे लखनऊ उत्तर क्षेत्र के निर्वाचित समाजवादी पार्टी पार्षद ललित किशोर तिवारी को आखिरकार पार्षद पद की शपथ दिलाई गई। हाईकोर्ट की सख्ती और स्पष्ट निर्देशों के बाद नगर निगम प्रशासन को शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी।
नगर निगम परिसर में सुबह करीब नौ बजे आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचे। इस दौरान “सत्य की जीत हुई” और “अखिलेश यादव जिंदाबाद” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। शपथ ग्रहण के बाद समर्थकों ने फूल-मालाओं से ललित किशोर तिवारी का स्वागत किया और मिठाइयां बांटीं।
बताया जा रहा है कि निर्वाचित होने के बावजूद लंबे समय तक उन्हें शपथ नहीं दिलाई जा रही थी। इसे लेकर समाजवादी पार्टी और समर्थकों ने लगातार विरोध जताया था। कई बार नगर निगम प्रशासन से मांग किए जाने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए नगर निगम प्रशासन से जवाब तलब किया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में देरी पर नाराजगी जाहिर की। अदालत के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने तत्काल शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया।
इस पूरे घटनाक्रम में लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल की भूमिका भी चर्चा में रही। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से जानबूझकर शपथ ग्रहण में देरी की गई। हालांकि नगर निगम प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
समाजवादी पार्टी नेताओं ने इसे लोकतंत्र और न्यायपालिका की जीत बताते हुए कहा कि अदालत ने विपक्षी जनप्रतिनिधि के अधिकारों की रक्षा की है। वहीं भाजपा समर्थकों ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम से लखनऊ उत्तर क्षेत्र की राजनीति में नया संदेश गया है और समाजवादी पार्टी को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल सकती है। स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि क्षेत्र की सड़क, सफाई, जलभराव और पेयजल जैसी समस्याएं नगर निगम में मजबूती से उठाई जाएंगी।
