महिला उद्यमिता से बदल रही उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, योगी सरकार की योजनाओं ने दी आत्मनिर्भरता को नई उड़ान

लखनऊ, 12 जुलाई। उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण अब केवल सामाजिक बदलाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण स्तंभ बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित विभिन्न योजनाओं और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के माध्यम से लाखों ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार, उद्यमिता और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाएं आज न केवल अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही हैं।

प्रदेश में वर्तमान समय में लगभग एक करोड़ महिलाएं करीब 10 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। ये समूह कृषि आधारित उद्योगों, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, सिलाई-कढ़ाई, ग्रामीण मार्ट और लघु उद्यमों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर सृजित कर रहे हैं। सरकार की वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, बैंक ऋण और विपणन सुविधाओं ने इन महिलाओं को उद्यमी बनने का आत्मविश्वास दिया है।

इसी बदलाव की एक प्रेरक कहानी वाराणसी की रीना सिंह की है। पति के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। कठिन परिस्थितियों में हार मानने के बजाय उन्होंने 11 महिलाओं के साथ मिलकर महादेव स्वयं सहायता समूह का गठन किया। शुरुआत छोटे स्तर पर मसालों और दालों के प्रसंस्करण से हुई, लेकिन आज यह समूह हल्दी, धनिया और दालों की प्रोसेसिंग का सफल उद्यम बन चुका है।

वाराणसी की रीना सिंह बनीं मिसाल, स्वयं सहायता समूह से खड़ा किया 80 लाख रुपये सालाना कारोबार, 200 से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार

रीना सिंह के नेतृत्व में संचालित इस महिला उद्यम का वार्षिक कारोबार 80 लाख रुपये से अधिक पहुंच चुका है। इस पहल से 200 से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार एवं नियमित आजीविका के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। यह मॉडल आज ग्रामीण महिला उद्यमिता की सफलता का प्रतीक बन गया है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब केवल कृषि उत्पादों का उत्पादन या कच्चा माल बेचने तक सीमित नहीं हैं। वे पैकेजिंग, ब्रांडिंग और आधुनिक विपणन तकनीकों का उपयोग कर अपने उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर रही हैं। इससे उन्हें बेहतर बाजार और अधिक आय मिल रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिला स्वयं सहायता समूहों के सशक्त होने से गांवों में आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं, पलायन में कमी आई है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को स्थायी आधार मिला है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से उत्तर प्रदेश की ग्रामीण विकास यात्रा को नई दिशा मिल रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षण, आसान ऋण, डिजिटल विपणन, उत्पाद ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराने जैसे कदम लगातार उठा रही है। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करना है। इसी दिशा में स्वयं सहायता समूह आज उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *