मुख्तार से मुक्त कराई जमीन पर बने फ्लैटों को अवैध बताने पर बवाल, नोटिस हटाने के बाद बैकफुट पर आया सिंचाई विभाग

लखनऊ, 18 जून 2026 (यूएनएस)। राजधानी लखनऊ में माफिया मुख्तार अंसारी के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर गरीबों के लिए बनाए गए आवासों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। गुरुवार को सिंचाई विभाग द्वारा सरदार पटेल आवासीय योजना के एक फ्लैट पर अवैध निर्माण का नोटिस चस्पा किए जाने से हड़कंप मच गया। हालांकि मामला तूल पकड़ने और मीडिया में खबरें आने के बाद विभाग को सफाई देनी पड़ी तथा नोटिस भी हटा लिया गया।

डालीबाग स्थित सरदार पटेल आवासीय योजना में सिंचाई विभाग की टीम पहुंची और एक फ्लैट की दीवार पर नोटिस चिपकाते हुए दावा किया कि निर्माण विभाग की भूमि पर अवैध रूप से किया गया है। नोटिस में सात दिन के भीतर कब्जा हटाने की चेतावनी दी गई थी। साथ ही यह भी कहा गया था कि निर्धारित समय के बाद विभाग स्वयं कार्रवाई करेगा और उससे होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी संबंधित पक्ष की होगी।

नोटिस लगने के बाद योजना में रहने वाले लोगों में चिंता फैल गई। स्थानीय निवासियों ने विभागीय कार्रवाई का विरोध करते हुए सवाल उठाया कि सरकारी योजना के तहत आवंटित फ्लैटों को अवैध कैसे घोषित किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि यह वही भूमि है जिसे पूर्व में माफिया मुख्तार अंसारी के कब्जे से मुक्त कराया गया था। लगभग 2314 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाली इस भूमि पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए सरदार पटेल आवासीय योजना विकसित की थी। यहां तीन आवासीय ब्लॉकों में कुल 72 फ्लैट बनाए गए थे, जिनका आवंटन गरीब परिवारों को किया गया।

विवाद बढ़ने के बाद सिंचाई विभाग ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि संबंधित नोटिस फ्लैटों को हटाने के लिए नहीं था, बल्कि आसपास के कथित अतिक्रमणों के संबंध में लगाया गया था। विभाग का दावा है कि फ्लैटों के संबंध में कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था और गलतफहमी के कारण नोटिस उस स्थान पर चस्पा हो गया था। बाद में उसे हटा लिया गया।

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब आरोप लगे कि सिंचाई विभाग ने नजूल और एलडीए की भूमि को अपनी भूमि बताकर कार्रवाई की कोशिश की। आलोचकों का कहना है कि यदि यह सरकारी स्वीकृति प्राप्त आवासीय परियोजना थी तो विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी होनी चाहिए थी। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर बिना तथ्यात्मक जांच के नोटिस जारी करने और सरकारी आवासीय परिसर को अवैध निर्माण बताने की जिम्मेदारी किसकी है।

अब इस पूरे प्रकरण को लेकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और राजनीतिक हलकों में मांग उठ रही है कि मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही दोबारा न हो।

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