प्राकृतिक खेती से स्वस्थ भारत की राह, मुख्यमंत्री योगी ने किसानों को किया सम्मानित

कानपुर/लखनऊ, 18 जून 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल कृषि पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ और समृद्ध समाज की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से जहां खेती की लागत बढ़ी है, वहीं लोगों में गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा है। ऐसे में प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ समाज को बेहतर स्वास्थ्य भी प्रदान कर सकती है।

मुख्यमंत्री गुरुवार को कानपुर में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला-2026’ को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित किया तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सहायता राशि के चेक भी वितरित किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब देश स्वस्थ होगा। प्राकृतिक खेती इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि बीते तीन दशकों में किडनी, लीवर, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है, जिसका एक बड़ा कारण कृषि में रासायनिक पदार्थों का बढ़ता उपयोग है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज लगभग हर क्षेत्र में किडनी रोगियों की संख्या बढ़ रही है। कई लोग डायलिसिस पर निर्भर हैं और अनेक मरीजों को प्रत्यारोपण की आवश्यकता पड़ रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से ऐसे खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने गोसंरक्षण और प्राकृतिक खेती के बीच संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि गाय आधारित खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। गोबर और गोमूत्र से तैयार जैविक खाद एवं कीटनाशक न केवल खेती की लागत कम करते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनाए रखते हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग गाय का दूध तो लेते हैं, लेकिन बाद में पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते हैं, जिससे फसलों को नुकसान होता है। सरकार इस समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने दोहराया कि प्रदेश सरकार गोसंरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और गायों की सुरक्षा भारतीय संस्कृति तथा सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में गोवंश की उपेक्षा या उनके साथ दुर्व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से किसान प्रति एकड़ लगभग 10 से 12 हजार रुपये तक की बचत कर सकते हैं। साथ ही उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य भी मिल सकता है। उन्होंने कहा कि यदि बाजार में सामान्य उपज 40 रुपये प्रति किलो और प्राकृतिक खेती से उत्पादित वस्तु 50 रुपये प्रति किलो उपलब्ध हो, तो लोगों को स्वास्थ्य की दृष्टि से प्राकृतिक उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने गंगा तटवर्ती 27 जिलों और बुंदेलखंड के सात जिलों को प्राकृतिक खेती के लिए विशेष रूप से चिन्हित किया है। इनमें से 24 जिलों में इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सरकार प्राकृतिक उत्पादों के प्रमाणीकरण, विपणन और बाजार उपलब्धता को आसान बनाने के लिए भी कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 7,700 से अधिक गो-आश्रय स्थलों में 14 लाख से ज्यादा गोवंश की देखभाल की जा रही है। वहीं मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत गोवंश पालन करने वाले किसानों को प्रति पशु प्रतिमाह 1,500 रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे लगभग डेढ़ लाख किसान लाभान्वित हो रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ जीवन देने का प्रभावी माध्यम बताते हुए अधिक से अधिक किसानों से इसे अपनाने का आह्वान किया।

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