लखनऊ, 03 जून 2026 (यूएनएस)। कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर सैकड़ों अपात्र लोगों के फर्जी आयुष्मान कार्ड बनवाकर सरकारी धन की हेराफेरी करने वाले गिरोह के एक और सदस्य को उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने बुद्धेश्वर क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। इस गिरोह के दो सदस्यों को 17 जून 2025 को प्रयागराज तथा सात अन्य आरोपियों को 24 दिसंबर 2025 को लखनऊ से गिरफ्तार किया जा चुका है।
अपर पुलिस अधीक्षक एसटीएफ विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि आयुष्मान कार्ड बनाने वाले संगठित गिरोह की तलाश में टीम लगातार जुटी हुई थी। इसी दौरान मुखबिर की सूचना पर मंगलवार शाम लगभग पांच बजे बुद्धेश्वर-पारा क्षेत्र से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। उसकी पहचान हरदोई जनपद के संडीला निवासी चक्र शेरू उर्फ अभिषेक उर्फ अजय के रूप में हुई, जो वर्तमान में लखनऊ के आलमनगर, तालकटोरा क्षेत्र में रह रहा था।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वर्ष 2023 में वह कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की परीक्षा की तैयारी के लिए लखनऊ आया था। नवंबर 2024 में उसने 102 एम्बुलेंस कार्यालय में सुरक्षा कर्मी के रूप में काम शुरू किया। मार्च 2025 में बुद्धेश्वर स्थित एक जन सेवा केंद्र पर आयुष्मान कार्ड बनवाने के दौरान उसकी मुलाकात अवनीश नामक व्यक्ति से हुई, जिसने उसे गिरोह के सरगना चंद्रभान वर्मा से मिलवाया। चंद्रभान ने उसे बताया कि वह किसी भी व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड बनवा सकता है। इसके बाद वह गिरोह से जुड़ गया और फर्जी कार्ड बनवाने के काम में शामिल हो गया।
आरोपी ने खुलासा किया कि अप्रैल 2025 में चंद्रभान ने उसकी मुलाकात एक सॉफ्टवेयर विकसित करने वाले व्यक्ति से कराई थी। उसने आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए एक फर्जी इंटरनेट पोर्टल तैयार किया था। इस पोर्टल के माध्यम से अपात्र लोगों को पात्र परिवारों की पारिवारिक पहचान संख्या में जोड़कर आयुष्मान कार्ड जारी कराए जाते थे।
आरोपी के अनुसार, पोर्टल में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों की पारिवारिक पहचान संख्या का विवरण मौजूद था। प्रणाली इस प्रकार तैयार की गई थी कि नए सदस्य को जोड़ते समय सत्यापन संदेश परिवार के मुखिया के बजाय नए सदस्य के आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर पहुंचता था। इससे बिना वास्तविक सत्यापन के लोगों को पात्र परिवारों में शामिल कर दिया जाता था।
चक्र शेरू ने बताया कि वह प्रतिदिन पांच से छह फर्जी आयुष्मान कार्ड बनवाता था और प्रत्येक कार्ड के लिए 700 से 800 रुपये वसूले जाते थे। इन कार्डों को स्वीकृति दिलाने के लिए गिरोह से जुड़े अन्य सदस्य विभिन्न स्तरों पर मदद करते थे। आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने पिछले एक वर्ष में लगभग 1500 फर्जी आयुष्मान कार्ड बनवाए हैं।
एसटीएफ के अनुसार, इन फर्जी कार्डों के माध्यम से अपात्र लोगों ने विभिन्न अस्पतालों में निशुल्क उपचार प्राप्त किया, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में गिरोह के सदस्य चंद्रभान वर्मा, राजेश मिश्रा, सुजीत कनौजिया, सौरभ मौर्य, विश्वजीत सिंह, रंजीत सिंह और अंकित यादव को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
एसटीएफ अब आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की न्यायिक वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी, जिससे पूरे फर्जीवाड़े के नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा सके।
