‘नारी को नारा बनाकर भ्रम फैलाना चाहती थी भाजपा’, अखिलेश यादव का हमला

लखनऊ, 20 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के अधिकारों के नाम पर भाजपा केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।

राजधानी लखनऊ में रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सत्तारूढ़ दल महिलाओं के नाम पर सिर्फ नारेबाजी कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा नारी को नारा बनाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही थी, जिसे विपक्ष ने रोक दिया।

सपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार देश में जनगणना तक नहीं करा पा रही है, तो महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने की बात कैसे की जा सकती है। उनके अनुसार, जनगणना के बिना नीतिगत फैसलों की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि जनगणना कराई जाती है तो जातीय जनगणना की मांग भी स्वाभाविक रूप से उठेगी, लेकिन सरकार इस दिशा में आगे बढ़ने से बच रही है।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार समाज के विभिन्न वर्गों को उनका वास्तविक अधिकार देने के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि आधी आबादी को अधिकार देने की बात करने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि उस प्रतिनिधित्व का आधार क्या होगा और उसका निर्धारण किस प्रकार किया जाएगा।

उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्तमान समय में विपक्ष ही देश के विभिन्न वर्गों की आवाज बनकर उभर रहा है। सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा पहले समाज को छोटे-छोटे वर्गों में बांटती है और फिर उनमें भय का माहौल बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करती है। उन्होंने इसे ‘डर और भ्रम की राजनीति’ करार दिया।

सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा का तथाकथित ‘सीएमएफ (क्रिएट मिस्ट्रस्ट एंड फियर)’ फार्मूला अब अप्रासंगिक हो चुका है और जनता इसे समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक के जरिए भाजपा महिलाओं के बीच विभाजन पैदा करना चाहती थी, लेकिन विपक्ष की एकजुटता ने इस प्रयास को विफल कर दिया।

अखिलेश यादव ने कहा कि वास्तविक सशक्तीकरण के लिए महिलाओं की समान भागीदारी जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि बढ़ती जनचेतना और महिलाओं की जागरूकता आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण बदल देगी और महिलाएं लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देंगी।

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