नई दिल्ली, 28 जुलाई 2026 (यूएनएस)। अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा गड़बड़ी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जांच की प्रत्यक्ष निगरानी करने से इनकार करते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) को और अधिक मजबूत एवं विशेषज्ञता आधारित बनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि वित्तीय पहलुओं की गहन जांच के लिए एसआईटी में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) और फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट स्वयं जांच की निगरानी नहीं करेगा, लेकिन यह सुनिश्चित करेगा कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से आगे बढ़े। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से अपना कार्य करने दिया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सुझाए गए अधिकारियों के आधार पर गठित एसआईटी का नेतृत्व एस. किरण कर रहे हैं। जांच दल में डीआईजी, आईजी और एसपी स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। अब वित्तीय दस्तावेजों, रसीदों और चंदे से जुड़े रिकॉर्ड की तकनीकी जांच के लिए एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और फॉरेंसिक ऑडिटर को भी टीम का हिस्सा बनाया जाएगा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अदालत से जांच की निगरानी करने तथा राम मंदिर ट्रस्ट की सभी दान रसीदों को सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना था कि देशभर के श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान की राशि के संबंध में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस पर अदालत ने कहा कि पहले एसआईटी को अपनी जांच पूरी करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाना चाहिए। न्यायालय ने एसआईटी को दो सप्ताह के भीतर जांच की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई भी दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।
सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से नई एसआईटी के गठन के लिए अधिकारियों के नाम मांगे थे। राज्य सरकार ने इसके बाद अधिकारियों की सूची अदालत के समक्ष प्रस्तुत की और एसआईटी का गठन किया गया। सरकार की ओर से बताया गया कि जांच प्रक्रिया जारी है और अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य निष्पक्ष जांच और पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, ताकि चंदे से जुड़े सभी वित्तीय पहलुओं की तथ्यात्मक और तकनीकी जांच प्रभावी ढंग से पूरी की जा सके।