वाशिंगटन/तेहरान, 14 जून (यूएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को समाप्त करने के लिए प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच प्रारंभिक समझौते पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं, जबकि ईरान ने इस पर सतर्क रुख अपनाते हुए कहा है कि अभी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सामाजिक मंच पर कहा कि ईरान के साथ समझौते पर शीघ्र सहमति बनने की संभावना है। उन्होंने कहा कि समझौता होने के बाद विश्व की तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी देशों के लिए खोल दिया जाएगा।
उधर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा कि दोनों पक्ष शांति समझौते के प्रारूप पर सहमत हो गए हैं और आगे की प्रक्रिया की तैयारी की जा रही है। उनके अनुसार इसके बाद तकनीकी स्तर की वार्ताएं भी होंगी।
हालांकि ईरान ने समझौते पर तत्काल हस्ताक्षर की संभावना से इनकार किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि समझौते की सटीक तिथि को लेकर अभी प्रतीक्षा करनी होगी। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में प्रगति संभव है, लेकिन अगले ही दिन समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना नहीं है।
यह पहली बार नहीं है जब दोनों देशों के बीच समझौते की उम्मीद जगी हो। इससे पहले भी कई अवसरों पर वार्ता आगे बढ़ती दिखाई दी, लेकिन अंतिम सहमति नहीं बन सकी। फरवरी में शुरू हुए संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा और इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ा है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि समझौते के मसौदे में अभी बदलाव की गुंजाइश बनी हुई है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान पहले की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में है।
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, अमेरिकी प्रतिबंधों में आंशिक राहत देने और ईरान की विदेशों में जमा संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं। इसके बदले ईरान से समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने की अपेक्षा की जा रही है।
परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी वार्ता का प्रमुख विषय बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को समाप्त करे, जबकि ईरान सीमित मात्रा में यूरेनियम संवर्धन जारी रखने के पक्ष में है। यही मतभेद समझौते के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा माना जा रहा है।
इस बीच, इजराइल ने स्पष्ट किया है कि वह प्रस्तावित समझौते का हिस्सा नहीं होगा। इजराइली नेतृत्व का कहना है कि उसकी सुरक्षा संबंधी नीतियां स्वतंत्र रूप से जारी रहेंगी।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष अपने प्रमुख मतभेद दूर करने में सफल रहते हैं तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से चला आ रहा तनाव कम हो सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिका, ईरान और मध्यस्थ देशों के बीच चल रही वार्ताओं पर टिकी हुई हैं।
