हंगामे के बीच लोकसभा से बिना चर्चा पारित हुआ जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026

लोकसभा ने विपक्ष के हंगामे के बीच बिना चर्चा के जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित कर दिया। विधेयक में एक वर्ष से अधिक देरी से होने वाले जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाने का प्रावधान किया गया है।

नई दिल्ली | 31 जुलाई, 2026: संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच लोकसभा ने जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 बिना किसी चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले 29 जुलाई को यह विधेयक राज्यसभा से भी मंजूरी प्राप्त कर चुका है।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक को पारित कराने के लिए प्रस्तुत किया। उस समय विपक्षी सदस्य दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर नारेबाजी कर रहे थे। हंगामे के कारण विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी और विपक्ष ने अपने संशोधन भी पेश नहीं किए।

यह विधेयक जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (2023 में संशोधित) की धारा 13(3) में बदलाव का प्रावधान करता है। इसका उद्देश्य एक वर्ष से अधिक की देरी से होने वाले जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को और अधिक सख्त एवं व्यवस्थित बनाना है।

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), उप मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अथवा किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होती है। नए संशोधन में देरी की अवधि के आधार पर दो-स्तरीय मंजूरी व्यवस्था लागू करने का प्रावधान किया गया है, जिससे विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और जवाबदेह बन सके।

विधेयक पारित होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार चाहती थी कि सभी सदस्य इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लें, लेकिन बार-बार आग्रह करने के बावजूद विपक्ष ने भाग नहीं लिया। उन्होंने कहा कि अब विपक्ष को सदन के बाहर यह आरोप नहीं लगाना चाहिए कि विधेयक बिना चर्चा के पारित किया गया।

रिजिजू ने कहा कि विपक्ष ने चर्चा का अवसर स्वयं गंवाया है और जनता उनसे इसका जवाब मांगेगी। उन्होंने विपक्ष से भविष्य में आने वाले महत्वपूर्ण विधेयकों पर सदन की कार्यवाही में सहयोग करने और सार्थक चर्चा में भाग लेने की अपील की।

सदन की कार्यवाही के दौरान पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने भी विपक्षी सदस्यों से कहा कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में सभी दलों ने विधेयक पर सहयोग का आश्वासन दिया था, लेकिन सदन में लगातार हंगामे के कारण चर्चा संभव नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सहयोग के बिना विधेयक पारित करना पड़ा, जो संसदीय परंपराओं के अनुरूप स्थिति नहीं है।

हंगामा जारी रहने पर पीठासीन सभापति ने लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी। विधेयक अब संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह कानून के रूप में लागू होगा।

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