स्मार्ट मीटरों पर नियामक आयोग की सख्ती, यूपीपीसीएल पर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना

लखनऊ, 6 जून 2026। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं की लगातार बढ़ रही शिकायतों के बीच उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड पर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने पाया कि रिचार्ज कराने के बाद निर्धारित समय सीमा में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई, जो निर्धारित सेवा मानकों का उल्लंघन है।

आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।

दो घंटे में बिजली बहाल करना अनिवार्य

विद्युत नियामक आयोग के ‘परफॉर्मेंस के मानक विनियम-2019’ के अनुसार स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के रिचार्ज के बाद कम से कम 95 प्रतिशत मामलों में दो घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल करना अनिवार्य है।

मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान निगम और वितरण कंपनियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों की समीक्षा में आयोग ने पाया कि कई दिनों में यह लक्ष्य पूरा नहीं किया गया। समीक्षा किए गए 16 दिनों में से 10 दिनों में अनुपालन 95 प्रतिशत से कम रहा। कुछ दिनों में यह आंकड़ा केवल 77 प्रतिशत तक सिमट गया।

तकनीकी दलीलें आयोग ने खारिज कीं

यूपीपीसीएल ने अपने बचाव में कहा कि ‘संशोधित वितरण क्षेत्र योजना’ (आरडीएसएस) के अंतर्गत बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाए जाने के कारण शुरुआती तकनीकी समस्याएं सामने आईं। निगम ने संचार व्यवधान, भुगतान प्रणाली और रिमोट प्रबंधन प्रणाली के बीच समन्वय की कमी तथा अधिक लेन-देन दबाव को देरी का कारण बताया।

हालांकि आयोग ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने स्पष्ट कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था में रिचार्ज के बाद बिजली आपूर्ति कुछ मिनटों में बहाल हो जानी चाहिए। दो घंटे से अधिक की देरी उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी में डालती है।

15 दिन में जमा करना होगा जुर्माना

आयोग ने यूपीपीसीएल को 15 दिनों के भीतर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही निगम को घटनाओं की मूल वजहों की विस्तृत जांच कर सुधारात्मक कदम उठाने और भविष्य में ऐसी स्थिति न बनने देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

अतिरिक्त बिजली शुल्क पर भी लगी थी रोक

गौरतलब है कि इससे पहले भी उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत देते हुए जून माह के बिलों में प्रस्तावित 10 प्रतिशत अतिरिक्त ईंधन अधिभार वसूली पर रोक लगा दी थी। यह अतिरिक्त वसूली लगभग 1,610 करोड़ रुपये की थी, जिसे उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियमों के विरुद्ध बताते हुए चुनौती दी थी।

आयोग ने मामले में यूपीपीसीएल से स्पष्टीकरण मांगते हुए अंतिम निर्णय तक उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क न वसूलने के निर्देश दिए थे। इस फैसले से प्रदेश के लगभग 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली थी।

बढ़ रही हैं स्मार्ट मीटरों को लेकर शिकायतें

प्रदेश में स्मार्ट मीटर परियोजना को बिजली व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन रिचार्ज के बाद बिजली बहाली में देरी, गलत बिलिंग और तकनीकी समस्याओं को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। नियामक आयोग की यह कार्रवाई संकेत देती है कि सेवा मानकों में लापरवाही बरतने पर बिजली कंपनियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

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