राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: हाईकोर्ट में सुनवाई टली, दो वर्षों में चौथे बड़े विवाद ने बढ़ाई पारदर्शिता पर बहस

लखनऊ, 23 जून। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से जुड़े मामले में सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में सुनवाई नहीं हो सकी। समयाभाव के कारण मामला नहीं सुना जा सका और अब इस जनहित याचिका पर 24 जून को सुनवाई होने की संभावना है। इस बीच चढ़ावा प्रकरण ने मंदिर प्रशासन और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

अधिवक्ता मोहित अशोक द्वारा दाखिल जनहित याचिका में मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे के कथित गबन की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई है। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे का ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से कराया जाए, ताकि पूरे वित्तीय प्रबंधन की निष्पक्ष समीक्षा हो सके।

यह मामला न्यायमूर्ति पंकज भाटिया और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की ग्रीष्मकालीन अवकाश खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध था, लेकिन अदालत में समय की कमी के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब 24 जून को इस मामले पर सुनवाई होने की उम्मीद है।

दो वर्षों में चार बड़े विवाद

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से पिछले दो वर्षों में राम मंदिर से जुड़े कई विवाद सामने आए हैं। इनमें से प्रत्येक ने मंदिर प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

सबसे पहले रामलला के मुकुट के गायब होने का मामला सामने आया था। प्रारंभिक स्तर पर इस घटना को सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन बाद में यह जानकारी सामने आई कि मुकुट ट्रस्ट से जुड़े एक व्यक्ति के करीबी के पास से बरामद हुआ था। हालांकि मामले में कोई बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई।

इसके बाद मंदिर से जुड़ी जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर विवाद उठा। आरोप लगाए गए कि कुछ जमीनों की खरीद बाजार मूल्य से अधिक दरों पर की गई। यह मामला लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का विषय बना रहा, लेकिन किसी निर्णायक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई।

वर्ष 2025 में दर्शन पास घोटाले ने भी सुर्खियां बटोरीं। जांच में पता चला कि फर्जी पास बनाकर श्रद्धालुओं से पैसे वसूले जा रहे थे। इस मामले में कुछ पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई थी। बाद में प्रशासन ने क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था लागू कर फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने का दावा किया।

अब चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि चढ़ावे की राशि और दान सामग्री के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। मामले में कुछ कर्मचारियों के साथ-साथ ट्रस्ट और प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

बढ़ रही निष्पक्ष जांच की मांग

लगातार सामने आ रहे विवादों के कारण श्रद्धालुओं और आम लोगों के बीच पारदर्शिता को लेकर चिंता बढ़ी है। कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहले सामने आए मामलों में जवाबदेही तय की जाती और निगरानी व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाया जाता, तो इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती थी। फिलहाल सभी की निगाहें 24 जून को प्रस्तावित सुनवाई पर टिकी हैं, जहां हाईकोर्ट इस मामले में आगे की दिशा तय कर सकता है।

आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में शामिल राम मंदिर से जुड़े इस विवाद ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि धार्मिक संस्थाओं में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे को भी राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है।

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