टीएमसी में घमासान तेज: ममता को हटाने का दावा, बागी गुट ने बनाई नई कमेटी; चुनाव चिन्ह और फंड पर भी जंग

कोलकाता, 22 जून 2026 (यूएनएस)। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष अब खुले राजनीतिक युद्ध में बदलता दिखाई दे रहा है। पार्टी के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को “असली टीएमसी” बताते हुए बड़ा कदम उठाया है। इस गुट ने दावा किया है कि पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता बनर्जी को पद से हटा दिया गया है, जबकि सांसद अभिषेक बनर्जी को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पार्टी के नए संगठनात्मक ढांचे की घोषणा करते हुए हावड़ा मध्य से विधायक अरूप रॉय को नया अध्यक्ष चुने जाने का दावा किया गया है।

न्यू टाउन स्थित एक होटल में आयोजित बागी गुट की बैठक में कथित तौर पर 60 विधायक और कोलकाता नगर निगम के 70 पार्षद शामिल हुए। बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि टीएमसी के संविधान के अनुसार हर तीन वर्ष में राष्ट्रीय कार्यकारिणी का पुनर्गठन होना चाहिए, लेकिन फरवरी 2022 के बाद संगठन का पुनर्गठन नहीं किया गया। उनके अनुसार इसी कारण पार्टी में संवैधानिक संकट उत्पन्न हो गया था और नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी।

बागी गुट ने अरूप रॉय को अध्यक्ष नियुक्त करने के साथ ही पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास, विधायक फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा की है। ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यह असली टीएमसी है और बैठक की पूरी कार्यवाही चुनाव आयोग को भेजी जाएगी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था। अब बागी गुट ने पलटवार करते हुए अलग संगठन खड़ा कर दिया है। इसके साथ ही राज्य की राजनीति में टीएमसी के तीन धड़ों में बंटने की चर्चा तेज हो गई है। पहला गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला मूल संगठन है, दूसरा ऋतब्रत बनर्जी का बागी गुट और तीसरा वह समूह बताया जा रहा है जिसमें कुछ सांसद अलग राजनीतिक राह पर चलने का दावा कर रहे हैं।

राजनीतिक संकट केवल संगठन तक सीमित नहीं है। अब पार्टी के चुनाव चिन्ह और करोड़ों रुपये के फंड पर भी विवाद गहराने लगा है। बागी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे पार्टी के चुनाव चिन्ह पर दावा करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इससे आने वाले दिनों में कानूनी और राजनीतिक लड़ाई दोनों तेज होने की संभावना है।

उधर टीएमसी नेतृत्व ने अपने तीन बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। पार्टी ने अदालत से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि खातों को किस आधार पर और किसके निर्देश पर फ्रीज किया गया। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने मामले में याचिका स्वीकार कर ली है और जल्द सुनवाई होने की संभावना है।

बताया जा रहा है कि जिन तीन खातों को फ्रीज किया गया है, उनमें लगभग 440 करोड़ रुपये जमा हैं। विवाद की शुरुआत तब हुई जब पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर खातों को फ्रीज करने का अनुरोध किया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और वित्तीय अधिकारों को लेकर भ्रम की स्थिति है।

टीएमसी नेतृत्व ने बाद में अरूप बिस्वास को कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन उन्होंने अपने जवाब में पार्टी के वित्तीय लेन-देन पर कई सवाल खड़े कर दिए। उनका आरोप है कि कई महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय उनकी जानकारी के बिना लिए गए। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने भी उनका समर्थन करते हुए खातों में मौजूद धन की जांच की मांग की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के भीतर बढ़ता यह संघर्ष पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। यदि चुनाव चिन्ह, संगठनात्मक वैधता और वित्तीय नियंत्रण को लेकर विवाद और बढ़ता है तो मामला चुनाव आयोग से लेकर अदालतों तक पहुंच सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में और बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

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