राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: एफआईआर के बाद जांच तेज, 8 आरोपी गिरफ्तार; बड़े सवाल अब भी बरकरार

अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। लगभग तीन सप्ताह तक चली विशेष जांच टीम (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आखिरकार कोतवाली रामजन्मभूमि में एफआईआर दर्ज करा दी गई। मामले में ट्रस्ट से जुड़े आठ लोगों को नामजद किया गया है, जबकि कई अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है और जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुट गई हैं।

हालांकि एफआईआर दर्ज होने के साथ ही एक नई बहस भी शुरू हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि कार्रवाई निचले स्तर तक सीमित रखी गई है, जबकि ट्रस्ट का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी। ऐसे में अब सबकी निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और पुलिस विवेचना पर टिकी हैं।

छह जून को सामने आया था मामला

राम मंदिर में चढ़ावे की गणना और प्रबंधन के दौरान कथित अनियमितताओं का मामला पहली बार 6 जून को सामने आया था। प्रारंभिक स्तर पर ट्रस्ट ने अपने स्तर पर संदिग्ध कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की। इसके बाद प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया।

करीब एक सप्ताह तक मंदिर परिसर, ट्रस्ट कार्यालय, बैंक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच के बाद एसआईटी ने 23 जून को शासन को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। इसी रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कराई गई।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत मंदिर के चढ़ावे और दानराशि में धोखाधड़ी कर सरकारी और धार्मिक संपत्ति का गबन किया। पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, आपराधिक विश्वासघात तथा लोकसेवक की संलिप्तता से संबंधित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। जांच में आगे मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।

ये हैं आठ नामजद आरोपी

एफआईआर में जिन लोगों को नामजद किया गया है, वे सभी किसी न किसी रूप में चढ़ावा गणना अथवा उसके प्रबंधन से जुड़े रहे हैं—

  • रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू (महासचिव चंपत राय का चालक)
  • अनुकल्प मिश्रा
  • लवकुश मिश्रा
  • मनीष यादव
  • अविनाश शुक्ला
  • सुभाष श्रीवास्तव (गणना प्रभारी)
  • करुणेश पांडेय
  • रमाशंकर मिश्र

इसके अलावा कई अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है, जिससे स्पष्ट है कि जांच का दायरा अभी और बढ़ सकता है।

जांच में क्या सामने आया?

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी को सीसीटीवी फुटेज, बैंक लेनदेन और दस्तावेजों की जांच के दौरान कई संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर चढ़ावे से निकाली गई नकदी को पहले गणना कक्ष से बाहर निकालकर अलग स्थानों पर छिपाया जाता था और बाद में उसका बंटवारा किया जाता था।

जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि यह कथित अनियमितता एक-दो दिन की थी या लंबे समय से चल रही थी। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

बरामदगी और पूछताछ

पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच के दौरान नकदी बरामद होने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि बरामद रकम और कुल कथित गबन की राशि को लेकर पुलिस अथवा ट्रस्ट की ओर से अभी कोई आधिकारिक अंतिम आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।

पूछताछ में कुछ बैंक अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के नाम भी सामने आने की चर्चा है। यदि जांच में इनके खिलाफ साक्ष्य मिलते हैं तो उन्हें भी आरोपी बनाया जा सकता है।

बैंकिंग व्यवस्था भी जांच के घेरे में

एसआईटी अब केवल नकदी की गणना तक सीमित नहीं है। जांच का अगला चरण बैंकिंग प्रक्रिया, चढ़ावे के जमा होने की व्यवस्था, खातों के संचालन और वित्तीय ऑडिट से जुड़े दस्तावेजों पर केंद्रित होगा। जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि कहीं प्रक्रिया में संस्थागत स्तर पर कोई कमी या लापरवाही तो नहीं रही।

ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों पर फिलहाल नहीं आंच

एफआईआर में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा अथवा निर्माण प्रभारी गोपाल राव का नाम शामिल नहीं है। इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं।

ट्रस्ट का कहना है कि एफआईआर एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई है और यदि आगे जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

विहिप-ट्रस्ट की बैठक से बढ़ीं अटकलें

एफआईआर दर्ज होने के दिन विश्व हिंदू परिषद और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक भी हुई। इसके बाद सोशल मीडिया पर चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की अफवाहें फैल गईं।

हालांकि मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव ने इन खबरों का खंडन करते हुए कहा कि किसी भी पदाधिकारी ने इस्तीफा नहीं दिया है और ऐसी सभी चर्चाएं निराधार हैं।

विपक्ष ने उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या पहुंचकर एसआईटी जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एसआईटी को राम मंदिर से जुड़ी कथित विवादित भूमि खरीद के 11 दस्तावेज सौंपते हुए वित्तीय अनियमितताओं की अलग से जांच की मांग की है।

दूसरी ओर, संत समाज के कुछ लोगों ने एफआईआर दर्ज होने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सच्चाई सामने आने का रास्ता खुला है और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।

आगे क्या?

अब पुलिस विवेचना इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी। जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, दान प्रबंधन प्रणाली और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका का विस्तृत परीक्षण करेंगी। यदि नए साक्ष्य सामने आते हैं तो आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है।

साथ ही एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित गड़बड़ी का वास्तविक स्वरूप क्या था, कितनी धनराशि प्रभावित हुई, क्या यह संगठित तरीके से किया गया अपराध था और इसकी जिम्मेदारी किन-किन स्तरों तक तय होती है। फिलहाल यह मामला केवल आठ आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि राम मंदिर की चढ़ावा प्रबंधन व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा बन चुका है।

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