ग्रेट निकोबार परियोजना पर राहुल गांधी का हमला, डॉक्यूमेंट्री जारी कर उठाए पर्यावरण और विस्थापन के सवाल

नई दिल्ली, 05 जून 2026 (यूएनएस)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की अपनी यात्रा पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री जारी करते हुए केंद्र सरकार की ग्रेट निकोबार परियोजना पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह परियोजना पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है तथा इसका राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

करीब 16 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार द्वीप की जैव विविधता, पारिस्थितिकी महत्व और आदिवासी समुदायों के जीवन पर संभावित प्रभावों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि वह विकास के विरोधी नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल और संतुलित विकास के पक्षधर हैं।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र प्रभावित होगा और लाखों पेड़ों की कटाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे मूंगा चट्टानों (कोरल रीफ) को नुकसान पहुंच सकता है तथा स्थानीय आदिवासी समुदायों और सैन्य प्रतिष्ठानों से जुड़े लोगों के विस्थापन की आशंका भी बढ़ेगी। उन्होंने दावा किया कि वन अधिकार कानून की भावना की अनदेखी की जा रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सामरिक जरूरतों को मजबूत करना चाहती है तो आईएनएस बाज के विस्तार पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार नौसेना लंबे समय से इसके विस्तार की मांग कर रही है।

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि देश के युवा पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझते हैं और केवल आर्थिक लाभ के लिए प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन स्वीकार नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ग्रेट निकोबार परियोजना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सामरिक और आर्थिक क्षमताओं को मजबूत करने की महत्वाकांक्षी योजना मानी जाती है। परियोजना की अनुमानित लागत 72,000 करोड़ रुपये से 92,000 करोड़ रुपये के बीच बताई जाती है। इसे वर्ष 2025 से 2035 के बीच चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

परियोजना के तहत ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह, हवाई अड्डा, विद्युत संयंत्र, सड़क नेटवर्क और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास प्रस्तावित है। सरकार का कहना है कि इससे भारत की समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक संपर्क और क्षेत्रीय रणनीतिक उपस्थिति को मजबूती मिलेगी।

हालांकि, पर्यावरणविदों और कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर पहले भी चिंताएं जताई जाती रही हैं। राहुल गांधी की ताजा टिप्पणी के बाद ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस एक बार फिर तेज होने की संभावना है।

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