नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरकारी खर्चों में कटौती और ईंधन बचत की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपने आधिकारिक काफिले को छोटा करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री ने उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले एसपीजी को निर्देश दिया है कि उनके काफिले में शामिल वाहनों की संख्या को 50 प्रतिशत तक कम करने का प्रयास किया जाए।
सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री ने अपने सुरक्षा बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की इच्छा भी जताई है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि इसके लिए नई गाड़ियां नहीं खरीदी जाएंगी, ताकि अतिरिक्त सरकारी खर्च से बचा जा सके।
ईंधन बचत और सरकारी खर्च में कटौती पर जोर, इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की पहल
एसपीजी ने प्रधानमंत्री के निर्देशों पर अमल शुरू कर दिया है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सुरक्षा से जुड़े “ब्लू बुक” दिशा-निर्देशों के साथ किसी प्रकार का समझौता न हो। हाल के दिनों में दिल्ली से बाहर प्रधानमंत्री के दौरों के दौरान उनका काफिला पहले की तुलना में छोटा दिखाई दिया है।
प्रधानमंत्री ने हाल ही में हैदराबाद दौरे के दौरान आम लोगों से भी ईंधन की खपत कम करने और सोने की अनावश्यक खरीद से बचने की अपील की थी। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे पूरी सरकार के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि सभी विभाग खर्चों में कटौती और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में कदम उठाएं।
सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में सरकारी मंत्रालयों और विभागों में भी कई सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। इसके तहत कर्मचारियों को अधिक से अधिक मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कार पूलिंग को बढ़ावा देने और मंत्रालयों में होने वाले बड़े व खर्चीले आयोजनों से बचने की भी तैयारी की जा रही है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विभिन्न विभागों में ईंधन की खपत कम करने के उपायों पर चर्चा चल रही है और सभी मंत्रालय अपने स्तर पर योजनाएं तैयार कर रहे हैं।
इस बीच सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों के एक अनौपचारिक समूह की बैठक में भी गैर-जरूरी यात्राओं में कटौती और ईंधन बचत के मुद्दे पर चर्चा हुई।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इसके चलते शिपिंग व्यवस्था प्रभावित हुई है और एलपीजी आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है तथा किसी प्रकार की कमी या राशनिंग की स्थिति नहीं है।
सरकार का कहना है कि देश के पास लगभग 60 दिनों का ईंधन भंडार मौजूद है और रिफाइनरियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं। सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और आयात बिल घटाने के उद्देश्य से ईंधन बचत, वर्क फ्रॉम होम, सार्वजनिक परिवहन और सतर्क खपत को बढ़ावा देने की अपील की है।
