सिराथू से फिर चुनाव लड़ेंगी पल्लवी पटेल, वाराणसी की सीटों पर भी अपना दल (क) की नजर

सिराथू से फिर चुनाव लड़ेंगी पल्लवी पटेल

लखनऊ, 02 जून (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक दलों ने अपने चुनावी समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में अपना दल (कमेरावादी) ने भी कई महत्वपूर्ण सीटों पर अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष पल्लवी पटेल का कौशांबी जिले की सिराथू विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है।

सिराथू वही सीट है जहां 2022 विधानसभा चुनाव में पल्लवी पटेल ने भाजपा प्रत्याशी और वर्तमान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को पराजित कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। यही कारण है कि पार्टी इस सीट को लेकर विशेष रूप से गंभीर है और एक बार फिर पल्लवी पटेल को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है।

पार्टी नेताओं के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में 2027 का विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अपना दल (कमेरावादी) के संभावित गठबंधन के तहत लड़ा जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने पिछड़ा वर्ग और पटेल बाहुल्य क्षेत्रों में संगठन को सक्रिय करने तथा जनसंपर्क अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं।

पूर्वांचल में भी अपना दल (क) अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। वाराणसी की दो विधानसभा सीटों पर पार्टी ने चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने समाजवादी पार्टी गठबंधन के साथ पिंडरा और रोहनिया सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि इस बार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे Ajay Rai के पिंडरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा के बीच अपना दल (क) रोहनिया और पटेल बहुल अजगरा विधानसभा सीट पर दावा मजबूत कर रहा है।

पार्टी का मानना है कि 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान जिन विधानसभा क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी को अपेक्षाकृत कम समर्थन मिला था, वहां अपना दल (क) अपने उम्मीदवार उतारकर गठबंधन को मजबूत कर सकता है। हालांकि सीटों के अंतिम बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन पर गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सिराथू से पल्लवी पटेल दोबारा चुनाव मैदान में उतरती हैं तो यह सीट एक बार फिर प्रदेश की सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल चुनावी लड़ाइयों में शामिल हो सकती है, खासकर तब जब भाजपा भी इस सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानकर चुनाव लड़ेगी।

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