लखनऊ, 02 जून (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन द्वारा बिजली बिलों में 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) लगाने के प्रस्ताव को प्रथम दृष्टया गैर-कानूनी करार दिया है। आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग के इस रुख के बाद फिलहाल जून माह के बिजली बिलों में प्रस्तावित 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूली की संभावना टलती नजर आ रही है।
पावर कॉरपोरेशन ने मार्च माह की बिजली खरीद लागत के आधार पर उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज वसूलने का आदेश जारी किया था। इसके चलते जून में आने वाले बिजली बिलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि मामला नियामक आयोग तक पहुंचने के बाद इस पर रोक लग गई है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर इस संबंध में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किया। परिषद ने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन ने मार्च माह की बिजली खरीद लागत के साथ लगभग 1,400 करोड़ रुपये की पुरानी देनदारियों और बकाया दावों को भी फ्यूल सरचार्ज की गणना में शामिल कर लिया, जो नियमों के विपरीत है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विद्युत नियामक आयोग ने तत्काल संज्ञान लेते हुए पावर कॉरपोरेशन को नोटिस जारी किया। आयोग ने कहा कि पिछली अवधि की देनदारियों को वर्तमान फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) की गणना में शामिल करना विनियम 16.1 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है और इससे उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है।
आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को निर्देश दिया है कि वह सात दिनों के भीतर वर्तमान एवं पूर्व अवधि की बिजली खरीद लागत, ट्रांसमिशन शुल्क तथा अधिभार निर्धारण से संबंधित सभी आंकड़ों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करे। जवाब मिलने के बाद आयोग इस मामले में अंतिम निर्णय सुनाएगा।
फिलहाल आयोग की प्रारंभिक आपत्ति के बाद जून माह में बिजली बिलों पर प्रस्तावित 10 प्रतिशत अतिरिक्त भार पड़ने की आशंका समाप्त होती दिखाई दे रही है। यदि आयोग अंतिम सुनवाई में भी इसी निष्कर्ष पर कायम रहता है तो उपभोक्ताओं को केवल वास्तविक बिजली खपत के आधार पर ही बिल का भुगतान करना होगा, जिससे प्रदेश के करोड़ों घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
