गुरु पूर्णिमा पर गुरु और शिष्य दोनों भूमिका में दिखेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गोरखनाथ मंदिर में निभाएंगे परंपरा

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 29 जुलाई को मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर में पारंपरिक गुरु पूजन करेंगे। वह अपने गुरुजनों का पूजन-अर्चन करने के साथ शिष्यों को आशीर्वाद भी देंगे। इस दौरान श्रीरामकथा की पूर्णाहुति और सहभोज का भी आयोजन होगा।

लखनऊ, 28 जुलाई 2026 (यूएनएस)। सनातन परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध को समर्पित पावन पर्व गुरु पूर्णिमा पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ 29 जुलाई को गोरखनाथ मंदिर में गुरु और शिष्य दोनों भूमिकाओं का निर्वहन करेंगे। गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार वह अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने के साथ-साथ अपने शिष्यों और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी प्रदान करेंगे।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे पहले नाथपंथ के आदिगुरु महायोगी गुरु गोरखनाथ का विधि-विधान से विशेष पूजन करेंगे। इसके बाद गोरक्षपीठ की गुरु परंपरा से जुड़े संतों की समाधियों तथा मंदिर परिसर में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन किया जाएगा। परंपरा के अनुसार महायोगी गोरखनाथ को रोट अर्पित किया जाएगा और सामूहिक आरती के साथ अनुष्ठान संपन्न होगा।

धार्मिक अनुष्ठानों के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर अपने शिष्यों और श्रद्धालुओं के बीच पहुंचेंगे। शिष्य तिलक लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। इसके पश्चात मंदिर परिसर में सहभोज का आयोजन भी किया जाएगा। इसी दिन 23 जुलाई से चल रही श्रीरामकथा का भी पूर्णाहुति समारोह संपन्न होगा।

नाथ संप्रदाय में गुरु को ईश्वर का स्वरूप माना जाता है। इसी कारण गुरु पूर्णिमा गोरक्षपीठ का सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पर्व माना जाता है। मुख्यमंत्री पद की व्यस्तताओं के बावजूद योगी आदित्यनाथ हर वर्ष इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर गुरु परंपरा का निर्वहन करते हैं।

गोरक्षपीठ की लोककल्याणकारी परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया गया कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने वर्ष 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में नई शुरुआत की थी। उनके उत्तराधिकारी ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज ने शिक्षा, चिकित्सा और योग के क्षेत्रों का विस्तार किया। वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, योग और सामाजिक सेवा के विभिन्न प्रकल्पों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

गोरक्षपीठ से संचालित गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय, शैक्षणिक संस्थान और योग प्रसार कार्यक्रम आज पूर्वांचल में सेवा और जनकल्याण के महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं। गुरु पूर्णिमा का यह महोत्सव न केवल आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है, बल्कि गुरु-शिष्य संबंध और लोककल्याण की गोरक्षपीठ की निरंतर चली आ रही विरासत का भी सशक्त उदाहरण माना जाता है।

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