शिवसेना (उद्धव गुट) पर मंडराया नया संकट, 7 सांसदों के टूटने की चर्चा से बढ़ी हलचल

नई दिल्ली/मुंबई, 17 जून। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की आहट सुनाई दे रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भीतर संभावित बगावत की चर्चाओं ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से कम से कम छह सांसद अलग गुट बनाने की तैयारी में हैं और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की संभावना भी जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि संभावित बागी सांसद पहले अलग संसदीय समूह बनाने और उसके बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ जाने की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक हलकों में “ऑपरेशन टाइगर” के नाम से जोड़ा जा रहा है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने पार्टी नेताओं और सांसदों के साथ लगातार बैठकें की हैं तथा साफ संदेश दिया है कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे स्वतंत्र हैं, लेकिन उन्हें भविष्य में अपने फैसले पर पछताना पड़ सकता है।

इस बीच राज्यसभा सांसद संजय राउत अचानक दिल्ली पहुंच गए। राउत ने पार्टी में किसी भी तरह की टूट की संभावना को खारिज करते हुए दावा किया कि सभी सांसद उद्धव ठाकरे के संपर्क में हैं और पार्टी एकजुट है। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से टूट की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, लेकिन इनमें कोई सच्चाई नहीं है।

हालांकि दूसरी ओर शिंदे गुट के नेताओं के दावे इन अटकलों को लगातार हवा दे रहे हैं। शिवसेना नेता कृपाल तुमाने ने दावा किया है कि उद्धव गुट के सात सांसद उनके संपर्क में हैं और बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उनका कहना है कि कई सांसद शिंदे के नेतृत्व में काम करने के इच्छुक हैं और जल्द ही बड़ा फैसला सामने आ सकता है।

राजनीतिक विवाद उस समय और बढ़ गया जब संजय राउत ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के सांसदों को पार्टी बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की जा रही है। राउत ने सामाजिक माध्यम पर पोस्ट कर दावा किया कि सांसदों को तोड़ने के लिए धनबल का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और विपक्षी दलों ने भी इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।

सूत्रों का कहना है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और भविष्य की भूमिका को लेकर भी असंतोष है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि छह या सात सांसदों का समूह वास्तव में अलग होता है तो यह 2022 में हुई शिंदे बगावत के बाद उद्धव ठाकरे के लिए दूसरा बड़ा झटका होगा। गौरतलब है कि 2022 में पार्टी विभाजन के बाद चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट को मूल शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी, जबकि उद्धव ठाकरे ने अलग संगठन के रूप में अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखी।

फिलहाल शिवसेना (यूबीटी) की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी सांसद के पार्टी छोड़ने की पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन दिल्ली और मुंबई में जारी बैठकों, नेताओं की आवाजाही और लगातार सामने आ रहे दावों-प्रतिदावों ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में ला खड़ा किया है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह केवल अटकल है या फिर शिवसेना (यूबीटी) एक नए राजनीतिक विभाजन की ओर बढ़ रही है।

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