पटना में एनडीए का शक्ति प्रदर्शन, पीएम मोदी की मौजूदगी में होगा सम्राट कैबिनेट विस्तार

पटना, 07 मई 2026। बिहार की राजनीति में बुधवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने जा रही है। इस शपथ ग्रहण समारोह को खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि पहली बार बिहार में किसी कैबिनेट विस्तार कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं शामिल होंगे।

पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में होने वाले इस भव्य कार्यक्रम को एनडीए के बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत गठबंधन के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी रहने की संभावना है। कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा, मंच निर्माण और वीआईपी मूवमेंट की तैयारियां तेज कर दी हैं।

33 मंत्री पद अभी खाली

बिहार विधानसभा की संख्या के अनुसार मुख्यमंत्री सहित कुल 36 विधायक मंत्री बन सकते हैं। फिलहाल सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं, जबकि विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव उपमुख्यमंत्री बनाए गए हैं। ऐसे में मंत्रिमंडल में अभी 33 पद खाली हैं, जिन पर नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना है।

बीजेपी-जेडीयू में बराबर हिस्सेदारी

एनडीए के भीतर बने फॉर्मूले के मुताबिक मुख्यमंत्री समेत भाजपा और जनता दल यूनाइटेड को 16-16 मंत्री पद मिलने की चर्चा है। वहीं शेष चार सीटें सहयोगी दलों के खाते में जा सकती हैं। सूत्रों के अनुसार चिराग पासवान की पार्टी को दो सीटें मिल सकती हैं, जबकि जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के दल को एक-एक सीट दिए जाने की संभावना है।

परिवारवाद की चर्चाएं भी तेज

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ सहयोगी दल अपने परिवार के सदस्यों को मंत्रिमंडल में शामिल करा सकते हैं। माना जा रहा है कि जीतन राम मांझी अपने बेटे को और उपेंद्र कुशवाहा अपनी पत्नी को मंत्री पद दिलाने की कोशिश में हैं।

सामाजिक और जातीय समीकरणों पर जोर

सूत्रों के मुताबिक संभावित मंत्रियों की सूची लगभग तैयार हो चुकी है। इसमें अनुभव, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जातीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को विशेष महत्व दिया गया है। भाजपा और जेडीयू दोनों ही ऐसे चेहरों को मौका देना चाहते हैं, जो आगामी चुनावी रणनीति में प्रभावी भूमिका निभा सकें।

एनडीए एकजुटता का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी के कारण इस कार्यक्रम का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए बिहार में अपनी ताकत, एकजुटता और चुनावी तैयारी का बड़ा संदेश देने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में 7 मई का यह समारोह बिहार की राजनीति में नई दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।

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