नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी की बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को गुरुवार को खारिज कर दिया। बंबई उच्च न्यायालय ने तीन बैंकों द्वारा उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खातों को फर्जी घोषित करने के लिए शुरू की गई कार्यवाही को जारी रखने की अनुमति दी थी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने अंबानी को बैंकों के ‘कारण बताओ नोटिस’ के खिलाफ उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष अपनी याचिका जारी रखने की अनुमति भी दी। पीठ ने एकल पीठ से अनुरोध किया कि वह इस मामले पर शीघ्र निर्णय करे।
उच्चतम न्यायालय ने यह आदेश अंबानी द्वारा दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें उन्होंने उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 23 फरवरी के आदेश को चुनौती दी थी। खंडपीठ ने एकल पीठ के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खिलाफ खातों को फर्जी घोषित करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी।
इसके साथ ही खंडपीठ ने तीन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और ऑडिट कंपनी बीडीओ इंडिया एलएलपी द्वारा दिसंबर 2025 में दायर अपीलों को स्वीकार कर लिया था।
एकल पीठ के आदेश में इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा की जा रही वर्तमान और भविष्य की सभी कार्रवाइयों पर रोक लगा दी गई थी। अदालत ने कहा था कि यह कार्रवाई कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण फॉरेंसिक ऑडिट पर आधारित है और भारतीय रिजर्व बैंक के अनिवार्य दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है।
अनिल अंबानी ने एकल पीठ के समक्ष इन तीनों बैंकों द्वारा जारी ‘कारण बताओ नोटिस’ को चुनौती दी थी, जिनमें उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस के खातों को फर्जी घोषित करने की मांग की गई थी।
