लखनऊ, 03 मई 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश में राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण को लेकर सरकार की सख्त मॉनीटरिंग का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद प्रदेशभर में लंबित मामलों के निपटारे में उल्लेखनीय तेजी आई है।
लखनऊ रहा शीर्ष पर
राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की अप्रैल माह की रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ ने पूरे प्रदेश में सबसे अधिक 18,861 मामलों का निस्तारण कर पहला स्थान हासिल किया है।
इसके बाद प्रयागराज (12,036 मामले) दूसरे, बाराबंकी (9,139 मामले) तीसरे और आजमगढ़ (8,483 मामले) चौथे स्थान पर रहे।
जौनपुर की लगातार शानदार प्रदर्शन
जनपदीय न्यायालयों में जौनपुर ने एक बार फिर पहला स्थान हासिल किया है। पिछले 16 महीनों से जौनपुर लगातार टॉप-5 जिलों में बना हुआ है।
जौनपुर के पांच राजस्व न्यायालयों ने प्रति माह 250 मामलों के मानक के मुकाबले 535 मामलों का निस्तारण कर 214 प्रतिशत की उपलब्धि दर्ज की।
अन्य जिलों का प्रदर्शन
बरेली ने 8,483 मामलों के साथ पांचवां स्थान प्राप्त किया, जबकि जौनपुर कुल 8,274 मामलों के साथ छठे स्थान पर रहा।
जनपदीय न्यायालय स्तर पर सुल्तानपुर दूसरे और गाजीपुर तीसरे स्थान पर रहे।
जिलाधिकारी न्यायालयों में भी बेहतर प्रदर्शन
जिलाधिकारी न्यायालयों में जौनपुर ने निर्धारित 30 मामलों के मानक के मुकाबले 70 मामलों का निस्तारण कर 233.33 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की, जो प्रदेश में सर्वाधिक है।
इसके बाद मऊ दूसरे और मैनपुरी तीसरे स्थान पर रहे।
प्रशासनिक सख्ती का असर
जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को राजस्व विवादों के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। नियमित समीक्षा बैठकों और विशेष अभियानों के जरिए लंबित मामलों को तेजी से निपटाया जा रहा है।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य न केवल आम जनता को समयबद्ध न्याय दिलाना है, बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी मजबूत करना है।
