राम मंदिर ट्रस्ट भंग करने की मांग पर कानूनी पेच, ट्रस्ट डीड में नहीं है विघटन का प्रावधान; सुरक्षा भी हुई और सख्त

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद भी इसके ट्रस्ट को भंग नहीं किया जा सकता। इस मामले में कई बार ट्रस्ट को भंग करने की बात उठी है।

अयोध्या, 20 जुलाई। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की मांग को लेकर शुरू हुई कानूनी और राजनीतिक बहस के बीच ट्रस्ट की मूल संरचना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। उपलब्ध ट्रस्ट डीड और सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर 2019 के ऐतिहासिक फैसले का अध्ययन बताता है कि ट्रस्ट को किसी भी परिस्थिति में भंग करने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, ट्रस्टियों में बदलाव और कुछ प्रशासनिक संशोधन किए जा सकते हैं, लेकिन ट्रस्ट की मूल संरचना और उद्देश्य को बदला नहीं जा सकता।

हाल ही में निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की मांग की है। इससे पहले हिंदू महासभा भी ट्रस्ट को भंग करने की मांग उठा चुकी है। इन मांगों के बाद ट्रस्ट की वैधानिक स्थिति और अधिकारों पर फिर से चर्चा तेज हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हुआ था ट्रस्ट का गठन

सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 के अयोध्या फैसले में केंद्र सरकार को तीन माह के भीतर योजना बनाकर ट्रस्ट गठित करने का निर्देश दिया था। इसी आदेश के अनुपालन में केंद्र सरकार ने 5 फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया और ट्रस्ट डीड लागू की।

ट्रस्ट डीड में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यह अपरिवर्तनीय (Irrevocable Trust) होगा। इसका अर्थ है कि ट्रस्ट को समाप्त या भंग करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं रखा गया है। डीड के अनुसार केवल ट्रस्टियों के इस्तीफे, नियुक्ति, हटाने की प्रक्रिया और कुछ प्रशासनिक प्रावधानों में संशोधन संभव हैं, लेकिन ट्रस्ट के मूल उद्देश्य, संरचना या सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।

बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज को सीमित संशोधन का अधिकार

ट्रस्ट डीड के अनुसार बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज को कुछ धाराओं में संशोधन करने का अधिकार है, लेकिन यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के फैसले, केंद्र सरकार की योजना और ट्रस्ट के मूल उद्देश्यों के अनुरूप ही हो सकते हैं। ट्रस्ट को समाप्त करने या उसकी वैधानिक पहचान खत्म करने का अधिकार किसी भी स्तर पर नहीं दिया गया है।

चढ़ावा विवाद के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले के सामने आने के बाद मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। मंदिर में निजी सुरक्षा कर्मियों की संख्या 300 से बढ़ाकर 350 कर दी गई है। साथ ही उनका मासिक मानदेय 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस, पीएसी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के अलावा निजी सुरक्षा एजेंसियों के कर्मचारी भी मंदिर परिसर के प्रवेश द्वारों, परिक्रमा मार्ग, यात्री सेवा केंद्र और अन्य संवेदनशील स्थलों पर तैनात हैं। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के बाद निगरानी प्रणाली को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

चंपत राय से मिले जनप्रतिनिधि, जांच पूरी होने तक संयम की अपील

राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से अयोध्या के पांचों विधायक और महापौर ने तीर्थ क्षेत्र कार्यालय में मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने पूरे घटनाक्रम पर चर्चा करते हुए कहा कि मामले की जांच एसआईटी कर रही है और अंतिम रिपोर्ट आने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

मुलाकात करने वालों में नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रुदौली विधायक रामचंद्र यादव, मिल्कीपुर विधायक चंद्रभानु पासवान, बीकापुर विधायक डॉ. अमित सिंह चौहान, गोसाईगंज विधायक अभय सिंह, महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी और जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रोहित सिंह शामिल रहे।

इससे पहले अयोध्या के व्यापारी संगठनों, साधु-संतों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी भी चंपत राय से मुलाकात कर उनके प्रति समर्थन जता चुके हैं। लगातार हो रही इन मुलाकातों को इस संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि जांच पूरी होने से पहले संगठन और समाज का एक बड़ा वर्ग चंपत राय से दूरी बनाने के बजाय उनके साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।

एसआईटी जांच पर टिकी निगाहें

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच फिलहाल विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जांच अंतिम चरण में है और रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। ऐसे में कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर सभी की निगाहें अब एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

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