फिर हिमंता के हाथ में असम की कमान, दूसरे कार्यकाल से बढ़ीं उम्मीदें

गुवाहाटी। पूर्वोत्तर में भाजपा के तेजी से विस्तार का व्यापक श्रेय पाने वाले हिमंत बिस्व सरमा का लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेना न केवल नेतृत्व की निरंतरता को दर्शाता है, बल्कि क्षेत्र में पार्टी की बढ़ती राजनीतिक पकड़ का भी संकेत माना जा रहा है।

कांग्रेस की ओर से तीखी आलोचना और उनकी पत्नी को लेकर लगाए गए आरोपों के बावजूद शर्मा पूरे चुनाव अभियान में आक्रामक और सक्रिय बने रहे। भाजपा को असम में प्रचंड जीत दिलाने के साथ उन्होंने पूर्वोत्तर की राजनीति में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की स्थिति और मजबूत कर दी।

राज्य की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने का संकल्प जताते हुए 57 वर्षीय नेता ने कहा है कि मुख्यमंत्री के रूप में उनका पहला कार्यकाल “ट्रेलर” था और दूसरे कार्यकाल में “फिल्म” दिखाई देगी। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने जालुकबारी सीट से 89,434 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ फिर साबित की।

वर्ष 2015 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद 2021 में मुख्यमंत्री बनने तक का उनका सफर संगठनात्मक कौशल और रणनीतिक राजनीति का उदाहरण माना जाता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद हिमंत बिस्व सरमा ने विकास परियोजनाओं, कल्याणकारी योजनाओं और स्वदेशी समुदायों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया।

हालांकि उनका कार्यकाल विवादों से भी घिरा रहा। विशेष रूप से बांग्लादेश मूल के बांग्ला भाषी मुसलमानों को लेकर दिए गए बयान और नीतियां लगातार बहस का विषय बनी रहीं। अतिक्रमण विरोधी अभियान, बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई, बहुविवाह पर सख्ती, मवेशी संरक्षण कानूनों का पालन और सरकारी मदरसों के पुनर्गठन जैसे कदमों को विपक्ष ने सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ाने वाला बताया।

विपक्षी दलों, खासकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने उनके कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए और उनकी पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा के कारोबारी लेनदेन पर सवाल उठाए। हालांकि मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के साथ इस मुद्दे पर विवाद भी काफी चर्चा में रहा।

कभी कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने वाले हिमंत बिस्व सरमा अब भाजपा के प्रमुख चुनावी रणनीतिकारों में शामिल हैं और विभिन्न राज्यों में पार्टी के अभियान का अहम चेहरा बन चुके हैं। हालांकि कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी शैली और बयानबाजी कई बार संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं दिखती।

वर्ष 1996 में पहला चुनाव हारने के बाद शर्मा 2001 से लगातार जालुकबारी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वह कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। 2001 से विभिन्न सरकारों में मंत्री रहने के दौरान उन्होंने प्रशासनिक दक्षता और राजनीतिक प्रबंधन दोनों में अपनी अलग पहचान बनाई।

पूर्व मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया और तरुण गोगोई के मार्गदर्शन में उन्होंने कांग्रेस में तेजी से उभरकर महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया। बाद में गौरव गोगोई के साथ मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए।

भाजपा में आने के बाद उन्होंने सर्बानंद सोनोवाल के साथ मिलकर 2016 में असम में पार्टी की पहली सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और लोक निर्माण जैसे अहम विभाग संभालने के बाद 2021 में वह मुख्यमंत्री बने।

जोरहाट में जन्मे हिमंत बिस्व सरमा प्रसिद्ध कवि और उपन्यासकार कैलाश नाथ शर्मा तथा साहित्यकार मृणालिनी देवी के पुत्र हैं। उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर और पीएचडी की उपाधि हासिल की तथा कानून की पढ़ाई भी की। गुवाहाटी उच्च न्यायालय में कुछ वर्षों तक वकालत करने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।

राजनीतिक दृढ़ता, संगठनात्मक क्षमता और विवादों के बीच भी अपनी पकड़ बनाए रखने की योग्यता ने हिमंत बिस्व सरमा को न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर की राजनीति का केंद्रीय चेहरा बना दिया है।

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