उत्तर प्रदेश में होगा ‘गो-टेक 2026’, गो-आधारित बायोइकोनॉमी और प्राकृतिक कृषि को मिलेगा नया मंच

उत्तर प्रदेश में अक्टूबर 2026 में चार दिवसीय ‘गो-टेक 2026’ का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन गो-संरक्षण, प्राकृतिक कृषि, तकनीकी नवाचार और गो-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए किसानों, वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों को एक मंच पर लाएगा।

लखनऊ | 23 जुलाई, 2026: उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में गो-संरक्षण, प्राकृतिक कृषि और गो-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के उद्देश्य से आगामी अक्टूबर 2026 में चार दिवसीय ‘गो-टेक 2026’ आयोजित करेगी। इस आयोजन को तकनीकी नवाचार, वैज्ञानिक शोध और ग्रामीण उद्यमिता के संगम के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है।

इसी सिलसिले में गुरुवार को उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के सभागार, इंदिरा भवन, लखनऊ में आयोजन की रूपरेखा और तैयारियों को लेकर अहम बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने की। इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व राष्ट्रीय कामधेनु आयोग अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया, डीडी किसान के संस्थापक नरेश सिरोही, बनासकांठा गोमूत्र डेयरी के देवाराम पुरोहित, रूरल हब के गौरव गुप्ता सहित आयोग के सदस्य और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में तय किया गया कि ‘गो-टेक 2026’ केवल एक प्रदर्शनी नहीं होगा, बल्कि गौशालाओं, किसानों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, शोध संस्थानों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों को एक साझा मंच पर लाकर सफल मॉडलों का आदान-प्रदान और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

आयोजन के लिए गोरखपुर, झांसी, वृंदावन, अयोध्या और लखनऊ में से किसी एक शहर का चयन किया जाएगा। इससे पहले अहमदाबाद, पुणे और जयपुर में भी गो-टेक महोत्सव का सफल आयोजन हो चुका है।

बैठक में गौशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि गो-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आत्मनिर्भर केंद्र के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। गोबर से बायोगैस, स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खाद, प्राकृतिक कृषि इनपुट और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण के माध्यम से ग्रामीण रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा हुई।

इसके साथ ही ‘विकसित भारत @2047’ के विज़न के अनुरूप ‘रूरल सर्कुलर बायोइकोनॉमी’ विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। बैठक में स्थानीय संसाधनों के वैज्ञानिक और सतत उपयोग के जरिए गोशालाओं, किसानों और ग्रामीण समुदायों को जोड़कर ऊर्जा उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।

Share this newsWhatsAppFacebookX

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *