लखनऊ। महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि यदि सरकार तुरंत लोकसभा में महिलाओं को आरक्षण लागू करती है तो कांग्रेस उसका पूरा समर्थन करेगी, लेकिन केवल दिखावा नहीं होना चाहिए। यह बात कांग्रेस के उत्तर प्रदेश मामलों के प्रभारी और पार्टी महासचिव अविनाश पांडे ने रविवार को कही।
यह वक्तव्य कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के विचार विभाग द्वारा आयोजित ‘महिला आरक्षण अधिनियम: सम्मान या छलावा’ विषयक संगोष्ठी में दिया गया, जिसमें प्रदेश भर से सैकड़ों महिलाएं शामिल हुईं।
महिलाएं समान अधिकार की हकदार
अविनाश पांडे ने कहा कि महिलाएं समाज में बराबरी की अधिकारिणी हैं और कांग्रेस ने हमेशा उन्हें मुख्य धारा में लाने के लिए कार्य किया है। उन्होंने इंदिरा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनाना महिला सशक्तीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम था।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण विधेयक कांग्रेस के समर्थन से पारित हुआ, लेकिन सरकार इसे लागू करने में विलंब कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार अभी इसे लागू करे, कांग्रेस पूरा समर्थन देगी, परंतु दिखावा न करे।
प्रदेश अध्यक्ष का हमला
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि पार्टी महिलाओं के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने घर की महिलाओं को सम्मान नहीं दे सकते, वे देश की महिलाओं को क्या सम्मान देंगे।
उन्होंने वाराणसी स्थित बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की एक घटना का उल्लेख करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर महिला सम्मान के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
अन्य नेताओं के विचार
कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य किया है। उन्होंने बताया कि राजीव गांधी ने पंचायतों में महिला आरक्षण लागू किया था, जिसका उस समय भारतीय जनता पार्टी ने विरोध किया था।
उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि क्या भारतीय जनता पार्टी भविष्य में किसी महिला को प्रधानमंत्री या राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाएगी, जैसा कि कांग्रेस ने पहले किया है।
विशेषज्ञों की राय
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता और लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूपरेखा वर्मा ने कहा कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बावजूद इसे 2029 तक टालना महिलाओं के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी बालिकाओं के साथ जन्म से पहले ही भेदभाव शुरू हो जाता है, जिसे बदलने की आवश्यकता है।
गोष्ठी में सामाजिक कार्यकर्ता नाइस हसन और विचार विभाग के अध्यक्ष एच.एल. दुसाध ने भी महिला सशक्तीकरण और आरक्षण की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
