लखनऊ, 05 मई 2026। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर और बिजली कनेक्शनों को लेकर विवाद अब तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने सख्ती दिखाते हुए यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक को 24 घंटे के भीतर विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है। आयोग ने साफ किया है कि समयसीमा में जवाब नहीं मिलने पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
गौरतलब है कि 16 अप्रैल को उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की याचिका पर आयोग ने पावर कॉरपोरेशन से 10 दिनों में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन तय समय बीतने के बावजूद कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसे आयोग ने गंभीर लापरवाही माना है।
इस बीच, हाल ही में मुख्यमंत्री के निर्देश पर UPPCL ने प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त करने और करीब 75 लाख उपभोक्ताओं के कनेक्शन को पोस्टपेड में बदलने का ऐलान किया था। हालांकि, उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि जमीनी स्तर पर अब भी नए कनेक्शन प्रीपेड मोड में ही दिए जा रहे हैं और पुराने पोस्टपेड कनेक्शनों को बिना सहमति प्रीपेड में बदला जा रहा है।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन का समय पर जवाब न देना उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी है और पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।
आयोग के अनुसार, इस मामले में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) तथा केंद्र और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की आशंका भी जताई गई है।
आयोग की इस सख्ती के बाद पावर कॉरपोरेशन में हड़कंप की स्थिति है। माना जा रहा है कि यदि 24 घंटे में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो आयोग कड़ी कार्रवाई कर सकता है, जिससे पूरे मामले में बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आ सकता है।
