बिहार विधान परिषद चुनाव: भाजपा और जदयू ने घोषित किए उम्मीदवार, एनडीए ने साधा सामाजिक संतुलन

पटना, 6 जून 2026। बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (यूनाइटेड) ने चार-चार प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक संतुलन और जातीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया है।

भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने पवन सिंह, डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, जनता दल (यू) ने निशांत कुमार, भारती मंडल, ललन प्रसाद और शिवरानी देवी को टिकट दिया है।

जेडीयू की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष उमेश कुशवाहा द्वारा जारी पत्र के अनुसार, निशांत के अलावा उपचुनाव के लिए ललन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया गया है। अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) की धनुक जाति से आने वाले ललन प्रसाद को जदयू नेतृत्व का करीबी माना जाता है।

आगामी चुनाव के लिए जेडीयू ने दो महिला उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारा है, जिनमें पार्टी की प्रवक्ता और महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष भारती मेहता और पश्चिम चंपारण की पार्टी कार्यकर्ता शिवरानी देवी प्रजापति शामिल हैं। मधुबनी की रहने वाली भारती मेहता पूर्व में बिहार राज्य संस्कृत शिक्षा बोर्ड की अध्यक्ष रह चुकी हैं। वह अत्यंत पिछड़ा वर्ग की नोनिया समुदाय से आती हैं। वहीं, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की कुम्हार जाति से संबंध रखने वाली शिवरानी देवी प्रजापति जेडीयू की पूर्व प्रदेश महासचिव रह चुकी हैं।

उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व भी स्पष्ट दिखाई देता है। एनडीए के आठ घोषित उम्मीदवारों में पांच अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं। जदयू ने तीन अति पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को मौका दिया है, जबकि भाजपा ने दो सवर्ण और दो अति पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशी उतारे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह रणनीति आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में नौ विधान परिषद सीटों के लिए चुनाव होना है। चुनावी गणित के अनुसार यदि सभी विधायक मतदान करते हैं तो जीत के लिए आवश्यक कोटा 2431 मत मूल्य होगा। चूंकि प्रत्येक विधायक के वोट का मूल्य 100 माना जाता है, इसलिए लगभग 25 विधायकों की पहली वरीयता का समर्थन किसी उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए पर्याप्त माना जाता है।

विधानसभा में वर्तमान संख्या बल को देखते हुए एनडीए मजबूत स्थिति में है। जदयू, भाजपा, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को मिलाकर गठबंधन के पास 202 विधायक हैं। इस आधार पर एनडीए के लिए आठ सीटें जीतना आसान माना जा रहा है। वहीं राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और अन्य सहयोगी दलों सहित विपक्षी गठबंधन के पास लगभग 41 विधायक हैं, जो एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या है।

चुनाव में पहली वरीयता के मतों के अलावा दूसरी वरीयता के वोट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि पहली वरीयता के आधार पर सभी सीटों का फैसला नहीं हो पाता, तो अतिरिक्त मतों का हस्तांतरण कर दूसरी वरीयता के मतों की गणना की जाती है। इसी प्रक्रिया के जरिए पूर्व में राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार शिवेश राम को जीत मिली थी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मौजूदा संख्या बल के आधार पर नौ में से आठ सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि शेष एक सीट के लिए विपक्ष की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है। बिहार विधान परिषद का यह चुनाव आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की संगठनात्मक ताकत और सामाजिक समीकरणों की भी महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *