लखनऊ, 26 मई 2026 (यूएनएस)। राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कलां गांव में मकबरा और कथित मंदिर विवाद को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। बड़े मंगल के मद्देनजर विवादित ढांचे के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और आम लोगों के वहां जाने पर रोक लगा दी गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गांव के बागों और सभी प्रमुख रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन को आशंका है कि धार्मिक गतिविधियों के नाम पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो सकती है।
दरअसल, बीते शनिवार को योगेश पासी शाम करीब साढ़े छह बजे गांव में स्थित दो पुराने ढांचों के पास पहुंचे थे और वहां हनुमान चालीसा पढ़ने का प्रयास किया था। उन्होंने मंगलवार को दोबारा पहुंचकर हनुमान चालीसा पाठ करने की बात भी कही थी। इसके बाद से प्रशासन हाई अलर्ट पर है।
इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि सभी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस बल विवादित स्थल के आसपास और बाग क्षेत्रों में भी तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।
सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को पुरातत्व विभाग की टीम के भी मौके पर पहुंचने की संभावना है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
वहीं सूरज पासी ने सोमवार को मोहनलालगंज सांसद आरके चौधरी, अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद, मछलीशहर सांसद प्रिया सरोज और कौशांबी सांसद पुष्पेंद्र सरोज से वीडियो जारी कर समर्थन मांगा।
सूरज पासी ने दावा किया कि कसमंडी में स्थित मकबरा और मस्जिद का ढांचा मूल रूप से राजापासी राजा कंस का शिव मंदिर और किला था, जिसका निर्माण वर्ष 980 से 1031 के बीच हुआ था। उन्होंने कहा कि आज भी वहां दीवारों पर हिंदू परंपरा से जुड़ी आकृतियां दिखाई देती हैं।
इसके समर्थन में हरदोई और सीतापुर जिलों में नुक्कड़ सभाएं भी आयोजित की गईं, जहां लोगों से “किला बचाने” के लिए समर्थन मांगा गया। प्रशासन ने फिलहाल मामले को संवेदनशील मानते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।
