लखनऊ, 19 जून 2026 (यूएनएस)। लखनऊ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। विश्वविद्यालय के विधि संकाय को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से पांच वर्षीय बीबीए-एलएलबी इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रम संचालित करने की मंजूरी मिल गई है। यह नया पाठ्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू होगा। बीसीआई की स्टैंडिंग कमेटी ने तीन सेक्शन में कुल 180 सीटों की स्वीकृति प्रदान की है।
इस मंजूरी के साथ लखनऊ विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बन गया है, जो अपने मुख्य परिसर में सीधे बीबीए-एलएलबी इंटीग्रेटेड डिग्री कार्यक्रम संचालित करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे प्रदेश के विद्यार्थियों को कम खर्च में उच्च गुणवत्ता वाली कॉर्पोरेट और विधिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने कहा कि बीसीआई की स्वीकृति केवल एक नए पाठ्यक्रम की शुरुआत नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य छात्रों को वैश्विक स्तर की कानूनी शिक्षा प्रदान कर उन्हें सक्षम विधि विशेषज्ञ और जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना है। उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम बदलती पेशेवर आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
नया बीबीए-एलएलबी कार्यक्रम प्रबंधन और कानून का समन्वित पाठ्यक्रम होगा। इसमें छात्रों को वित्तीय लेखांकन, विपणन, व्यवसाय प्रबंधन और संगठनात्मक व्यवहार जैसे प्रबंधन विषयों के साथ संवैधानिक कानून, व्यापार कानून, कंपनी कानून और अंतरराष्ट्रीय विधिक प्रणालियों का अध्ययन कराया जाएगा। साथ ही छात्रों में शोध क्षमता, तार्किक सोच, समस्या समाधान और संवाद कौशल विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
पाठ्यक्रम को पूरी तरह व्यावहारिक स्वरूप देने के लिए मूट कोर्ट, लीगल ड्राफ्टिंग, लीगल राइटिंग, केस स्टडी और कॉर्पोरेट कंपनियों व प्रतिष्ठित लॉ फर्मों में इंटर्नशिप को अनिवार्य बनाया गया है। इससे छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही वास्तविक कार्य अनुभव प्राप्त होगा और वे पेशेवर चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकेंगे।
विश्वविद्यालय के अनुसार इस ड्यूल डिग्री कार्यक्रम को पूरा करने वाले छात्रों के लिए रोजगार की व्यापक संभावनाएं खुलेंगी। वे कॉर्पोरेट लॉ फर्मों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों, बीमा क्षेत्र और विभिन्न औद्योगिक संगठनों में लीगल एडवाइजर, कंप्लायंस ऑफिसर, लीगल मैनेजर और कॉर्पोरेट कंसल्टेंट जैसे पदों पर कार्य कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त छात्र न्यायिक सेवा (पीसीएस-जे) सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी शामिल हो सकेंगे और स्वतंत्र रूप से वकालत का पेशा भी अपना सकेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह पाठ्यक्रम प्रदेश के युवाओं को आधुनिक कानूनी और प्रबंधन शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा तथा उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगा।
