पुनर्वास विश्वविद्यालय बना ईसरो का नोडल सेंटर, विद्यार्थियों को मिलेगा अंतरिक्ष विज्ञान का प्रशिक्षण

लखनऊ, 19 जून 2026 (यूएनएस)। राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ईसरो) के राष्ट्रीय शैक्षिक प्रसार कार्यक्रमों के संचालन के लिए नोडल सेंटर के रूप में चयनित किया गया है। इस उपलब्धि के साथ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, रिमोट सेंसिंग और जियोस्पेशियल तकनीक जैसी आधुनिक वैज्ञानिक विधाओं का प्रशिक्षण सीधे विशेषज्ञों से प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

ईसरो के अधीन कार्यरत भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान देशभर के शैक्षणिक संस्थानों के लिए समय-समय पर ऑनलाइन एवं ऑफलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। नोडल सेंटर बनने के बाद विश्वविद्यालय के विद्यार्थी इन कार्यक्रमों में भाग लेकर उपग्रह तकनीक, पृथ्वी अवलोकन, डिजिटल मैपिंग, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण अध्ययन और भू-स्थानिक डेटा के उपयोग से जुड़ी नवीनतम तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे।

विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के सहायक प्रोफेसर विनय कुमार सिंह को इस पहल के लिए नोडल समन्वयक नियुक्त किया गया है। वे विद्यार्थियों और शिक्षकों को ईसरो के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने तथा उनके प्रभावी संचालन की जिम्मेदारी निभाएंगे।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव रोहित सिंह ने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ-साथ उन्हें अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने कहा कि छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी तकनीकी समझ और अधिक मजबूत होगी।

कुलपति संजय सिंह ने इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ईसरो के शैक्षिक प्रसार कार्यक्रम विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिभागियों को देश के अग्रणी वैज्ञानिकों से सीखने और नवीन शोध कार्यों से जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अधिक से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करेगा, ताकि परिसर में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और अनुसंधान की संस्कृति को नई गति मिल सके। यह पहल विद्यार्थियों को भविष्य की उन्नत तकनीकों और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में करियर निर्माण के लिए भी बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगी।

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