राम मंदिर दान चोरी: टिन्नू ने अनिल मिश्रा समेत तीन इंचार्जों के नाम लिए, संपत्ति संबंधी आरोपों को बताया निराधार

अयोध्या, 17 जून। श्रीराम मंदिर की दानराशि में कथित गड़बड़ी के मामले में चर्चा में आए रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू मंगलवार को पहली बार कैमरे के सामने आए। उन्होंने दानराशि की गिनती प्रक्रिया को लेकर कई महत्वपूर्ण दावे किए और कहा कि नकदी की गिनती निर्धारित व्यवस्था के तहत की जाती थी, जिसकी निगरानी विभिन्न जिम्मेदार लोगों द्वारा की जाती थी।

टिन्नू ने दावा किया कि दानराशि की गिनती प्रक्रिया में तीन इंचार्ज नियुक्त थे, जिनमें दीनानाथ वर्मा, प्रकाश गुप्ता और सुभाष श्रीवास्तव शामिल थे। उनके अनुसार दानपात्र खोलने के लिए दो अलग-अलग चाबियों का उपयोग किया जाता था। इनमें एक चाबी ट्रस्ट के पास और दूसरी बैंक कर्मियों के पास रहती थी। दोनों चाबियों से ताला खोलने के बाद ही गिनती की प्रक्रिया शुरू होती थी।

उन्होंने कहा कि ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा नकदी प्रबंधन और गिनती प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी संभालते थे। टिन्नू के इस बयान के बाद गिनती व्यवस्था से जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) इन सभी संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर रही है या जल्द कर सकती है।

टिन्नू ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ एक सुनियोजित साजिश की जा रही है। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लिया, लेकिन दावा किया कि कुछ लोग उन्हें बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं।

इस बीच, दानराशि गड़बड़ी प्रकरण के साथ उनकी कथित संपत्ति को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। वीडियो संदेश जारी कर टिन्नू ने कहा कि उनकी संपत्ति को लेकर फैलाए जा रहे दावे भ्रामक और तथ्यहीन हैं।

उन्होंने बताया कि वह वर्ष 1993 में विश्व हिंदू परिषद से जुड़े और राम जन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय रहे। उनके अनुसार जिस जमीन और मकान को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह जमीन वर्ष 2008 में खरीदी गई थी, जबकि मकान का निर्माण वर्ष 2015 में कराया गया था।

टिन्नू ने कहा कि यह संपत्ति संगठन से प्राप्त मानदेय और उनके ऑटोमोबाइल व्यवसाय की आय से अर्जित की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि राम मंदिर निर्माण के दौरान उन्होंने अपना मकान निर्माण कार्य में लगी कंपनी को किराए पर दिया था, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।

उन्होंने अपने पास 50 करोड़ रुपये की संपत्ति होने के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे दुष्प्रचार बताया। टिन्नू ने कहा कि सच्चाई जांच के दौरान सामने आ जाएगी और अंतिम फैसला भगवान श्रीराम के न्याय पर छोड़ देना चाहिए।

उधर, दानराशि गड़बड़ी मामले की जांच जारी है और जांच एजेंसियां गिनती प्रक्रिया, नकदी प्रबंधन तथा संबंधित कर्मचारियों और पदाधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

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