मैक्स हॉस्पिटल में टॉन्सिल कैंसर के मरीज की सफल रोबोटिक सर्जरी

लखनऊ, 30 मई 2026 (यूएनएस)। कैंसर उपचार के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक की बढ़ती उपयोगिता का एक और सफल उदाहरण सामने आया है। लखनऊ स्थित मैक्स हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने स्टेज-2 टॉन्सिल कैंसर से पीड़ित 35 वर्षीय मरीज का अत्याधुनिक ट्रांस ओरल रोबोटिक सर्जरी (टीओआरएस) तकनीक के माध्यम से सफल उपचार किया है। इस प्रक्रिया में बिना किसी बड़े बाहरी चीरे, बिना दिखाई देने वाले निशान और कम रिकवरी समय के साथ कैंसरग्रस्त ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटाया गया।

बिना बाहरी कट और कम रिकवरी समय में मिला नया जीवन

बहराइच निवासी शकील अहमद पिछले कई सप्ताह से लगातार गले में दर्द और निगलने में कठिनाई की समस्या से परेशान थे। शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य संक्रमण समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन समस्या बढ़ने पर उन्होंने मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में चिकित्सकीय परामर्श लिया। विस्तृत जांच और क्लीनिकल मूल्यांकन के बाद उन्हें स्टेज-2 टॉन्सिल कैंसर होने की पुष्टि हुई।

चिकित्सकों के अनुसार टॉन्सिल कैंसर सिर और गर्दन के कैंसर की श्रेणी में आता है और समय पर उपचार न मिलने पर यह बोलने, निगलने तथा जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। मरीज की स्थिति का आकलन करने के बाद अस्पताल की मल्टीडिसिप्लिनरी ऑन्कोलॉजी टीम ने रोबोटिक तकनीक से सर्जरी करने का निर्णय लिया।

यह सर्जरी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. कमलेश वर्मा और उनकी टीम की देखरेख में की गई। अत्याधुनिक दा विंची सर्जिकल सिस्टम की सहायता से टॉन्सिल के कैंसरग्रस्त ट्यूमर को मुंह के रास्ते हटाया गया, जबकि गर्दन के प्रभावित लिम्फ नोड्स को छोटे चीरे के माध्यम से निकाला गया। इस प्रक्रिया से शरीर के ऊतकों को न्यूनतम क्षति पहुंची और मरीज के शरीर पर बहुत कम निशान रहे।

डॉ. कमलेश वर्मा ने बताया कि ट्रांस ओरल रोबोटिक सर्जरी हेड एंड नेक कैंसर के उपचार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कुछ चयनित मरीजों में यह तकनीक लंबे समय तक चलने वाली कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी की आवश्यकता को काफी हद तक कम कर सकती है और कई मामलों में इससे बचाव भी संभव हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मरीज के चेहरे या गर्दन पर बड़े बाहरी कट लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे उसकी रिकवरी तेज होती है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।

सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति तेजी से सामान्य हुई। अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार ऑपरेशन के तीन से चार दिनों के भीतर मरीज पूरी तरह स्थिर हो गया और उसने सामान्य रूप से भोजन करना भी शुरू कर दिया। रिकवरी के दौरान उसे अपेक्षाकृत कम दर्द और असुविधा का सामना करना पड़ा।

विशेषज्ञों ने बताया कि टॉन्सिल कैंसर सहित सिर और गर्दन के कैंसर के मामले अब कम उम्र के लोगों में भी बढ़ रहे हैं। तंबाकू सेवन, धूम्रपान, शराब का अत्यधिक उपयोग और एचपीवी संक्रमण इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। लगातार गले में दर्द, निगलने में परेशानी, आवाज में बदलाव या गर्दन में बिना कारण सूजन जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए और समय रहते चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि रोबोटिक असिस्टेड कैंसर सर्जरी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से मरीजों को बेहतर उपचार, कम दर्द, तेज रिकवरी और अधिक प्रभावी परिणाम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी तकनीकें कैंसर उपचार को और अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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