नकली हिंदुओं से सनातन को खतरा, गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करे सरकार : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

उरई/जालौन, 30 मई 2026 (यूएनएस)। गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर निकाली जा रही 81 दिवसीय “गौमाता-राष्ट्रमाता गविष्टि (गो-रक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा” शनिवार को जालौन जनपद के कोंच नगर पहुंची। जगद्गुरु आदि शंकराचार्य परंपरा के अधिष्ठाता स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नगर आगमन पर श्रद्धालुओं और सनातन धर्मावलंबियों ने भव्य स्वागत किया।

यात्रा के दौरान शंकराचार्य ने गौ संरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है, इसलिए सरकार को उसे पशु सूची से हटाकर आधिकारिक रूप से “गौमाता” और “राष्ट्रमाता” घोषित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब समाज गाय को माता के रूप में स्वीकार करता है तो सरकार का भी दायित्व बनता है कि उसके संरक्षण, संवर्धन और रखरखाव की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करे।

अपने संबोधन में शंकराचार्य ने कहा कि यह यात्रा केवल गौ रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य समाज को “असली और नकली हिंदुओं” की पहचान कराना भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग स्वयं को हिंदुत्व का समर्थक बताते हैं, लेकिन गौमाता की रक्षा और सम्मान के प्रश्न पर मौन साध लेते हैं। उनके अनुसार ऐसे लोगों के कारण सनातन परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है।

शंकराचार्य ने कहा, “जब तक इस देश में नकली हिंदू मौजूद हैं, तब तक सनातन धर्म को खतरा बना रहेगा। जो लोग हिंदुत्व की बात तो करते हैं, लेकिन गौमाता के सम्मान और संरक्षण के लिए आगे नहीं आते, वे समाज को भ्रमित कर रहे हैं।”

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विभिन्न राज्यों के कुछ नेताओं के बयानों पर भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जो लोग गौमांस के सेवन को सामान्य या स्वीकार्य बताने का प्रयास करते हैं, वे सनातन परंपरा की मूल भावना के विपरीत कार्य कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की राजनीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने एक नेता के उस बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें गाय को सीमित अवधि तक माता मानने की बात कही गई थी। शंकराचार्य ने कहा कि ऐसी सोच हिंदुत्व और सनातन संस्कृति के अनुरूप नहीं है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समाज समय रहते जागरूक नहीं हुआ तो आने वाले समय में सनातन संस्कृति और गौ संरक्षण की परंपरा को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत, गौभक्त और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। शंकराचार्य ने लोगों से गौ संरक्षण के लिए आगे आने और इस अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया।

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