दक्षिणी ईरान में अमेरिकी हवाई हमला, मिसाइल लॉन्च साइट और माइन बिछाने वाली नौकाएं बनीं निशाना

वॉशिंगटन/तेहरान, 26 मई 2026 (यूएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी मिसाइल लॉन्च साइटों तथा कथित तौर पर माइन बिछाने की तैयारी कर रही नौकाओं पर हवाई हमला किया है। अमेरिका ने इसे “सेल्फ डिफेंस स्ट्राइक” यानी आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताया है।

अमेरिकी सेना के अनुसार यह हमला अपने सैनिकों और युद्धपोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया गया। खास बात यह है कि यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम और परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है। इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है।

सेंटकॉम के मुताबिक, ईरानी सैन्य गतिविधियां अमेरिकी बलों और जहाजों के लिए खतरा बन रही थीं। सेंटकॉम के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी सेना ने आत्मरक्षा में सीमित लेकिन सटीक कार्रवाई की और संयम भी बरता।

अमेरिका का दावा है कि ईरानी नौकाएं होर्मुज जलडमरूमध्य के पास समुद्र में माइन बिछाने की कोशिश कर रही थीं। इसके अलावा कुछ मिसाइल लॉन्च साइटों को सक्रिय किया जा रहा था, जिन्हें संभावित खतरा मानते हुए निशाना बनाया गया। हालांकि हमले में हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

गौरतलब है कि इससे पहले मई की शुरुआत में भी अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की थी। उस समय अमेरिका ने आरोप लगाया था कि ईरान ने उसके युद्धपोतों पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नौकाओं से हमला करने की कोशिश की थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक राजनीति पर पड़ता है।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान का संवर्धित यूरेनियम या तो अमेरिका को सौंपा जाएगा ताकि उसे नष्ट किया जा सके, या फिर ईरान के साथ मिलकर उसी स्थान पर खत्म किया जाएगा।

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर बातचीत “अच्छे तरीके से” आगे बढ़ रही है। हालांकि उन्होंने इसे अब्राहम समझौतों से जोड़ते हुए कहा कि सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों को भी इस्राइल के साथ संबंध सामान्य करने वाले समझौतों में शामिल होना चाहिए।

हालांकि पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि इस्राइल को लेकर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वहीं सऊदी अरब ने भी कहा है कि फलस्तीनी राष्ट्र के स्पष्ट समाधान के बिना इस्राइल के साथ पूर्ण संबंध संभव नहीं हैं।

उधर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि कई मुद्दों पर बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन अभी किसी अंतिम समझौते का दावा नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी अधिकारियों के बार-बार बदलते बयान बातचीत को जटिल बना रहे हैं।

ईरान का कहना है कि वह शांति समझौते को लेकर गंभीर है, लेकिन उसे अमेरिका की नीतियों पर भरोसा चाहिए। वहीं अमेरिका लगातार सैन्य दबाव बनाए हुए है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

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