यूपी में ‘वन डे गवर्नेंस सेंटर’ शुरू करेगी सरकार, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र एक दिन में मिलेंगे

लखनऊ, 26 मई 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश में अब जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने या घर-जमीन के दाखिल-खारिज जैसे कार्यों के लिए लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के सभी नगर निगमों में “वन डे गवर्नेंस सेंटर” शुरू करने का फैसला किया है।

प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में इस नई पहल की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार नगर निकायों की सेवाओं को तेज, पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल बनाने पर काम कर रही है।

मंत्री ने बताया कि इन वन डे गवर्नेंस सेंटरों पर आम नागरिकों के कई जरूरी कार्य एक ही दिन में निपटाए जाएंगे। इनमें जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र, दाखिल-खारिज सहित अन्य नागरिक सेवाएं शामिल होंगी।

उन्होंने कहा कि लखनऊ में इस तरह का सेंटर तैयार हो चुका है, जबकि प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर में भी इसे शुरू करने की तैयारी चल रही है। सरकार का लक्ष्य भविष्य में इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करना है।

ए.के. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में “वन डे गवर्नेंस सिस्टम” की शुरुआत की थी और अब उसी मॉडल को उत्तर प्रदेश में लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसी नागरिक को प्रमाणपत्र या अन्य सेवाओं के लिए कई दिन या कई सप्ताह तक भटकना नहीं पड़ेगा। मंत्री के अनुसार, “कोई भी व्यक्ति आएगा तो उसे बैठाकर आधे घंटे में प्रमाणपत्र देने की कोशिश की जाएगी। यदि मामला जटिल होगा तो उसी दिन कुछ समय बाद समाधान कर दिया जाएगा।”

मंत्री ने बताया कि यह व्यवस्था खासतौर पर उन लोगों के लिए लाभकारी होगी, जो ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग नहीं कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि लखनऊ में बनाए गए सेंटर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैठने की विशेष व्यवस्था की गई है और चाय सहित अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

यह घोषणा लखनऊ महापौर के तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में की गई, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम में शहरी विकास, जनसुविधाओं और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई।

ए.के. शर्मा ने कहा कि सरकार की मंशा केवल स्मार्ट सिटी बनाना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के शहरों को वैश्विक स्तर की सुविधाओं से लैस करना है।

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