नीट पेपर लीक और महंगाई के विरोध में सपा का प्रदर्शन, पुलिस से भिड़े कार्यकर्ता

लखनऊ, 22 मई 2026 (यूएनएस)। नीट परीक्षा पेपर लीक, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राजधानी लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन किया। हजरतगंज चौराहे पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान सपा की लोहिया वाहिनी, छात्र सभा और यूथ ब्रिगेड के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंचे और सरकार विरोधी नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पोस्टरों पर “महंगाई की यह कैसी मार, मजे में नेता जनता लाचार” और “पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम, सरकार नाकाम” जैसे नारे लिखे थे।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिसके बाद कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। कुछ कार्यकर्ता पुलिस बस की छत पर भी चढ़ गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया।

कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी की और उन्हें सड़क पर घसीटा, जिससे कई लोगों के कपड़े फट गए और हाथों में चोटें आईं।

समाजवादी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव आनंद यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में महंगाई, बेरोजगारी और पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 69 हजार शिक्षक भर्ती सहित कई भर्ती प्रक्रियाएं वर्षों से लंबित हैं और सरकार ओबीसी वर्ग को उनका अधिकार देने में विफल रही है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश यादव द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ही जाति के तीन लोगों को तीन विश्वविद्यालयों का कुलपति नियुक्त किया है।

समाजवादी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव राज साहनी ने कहा कि नीट परीक्षा पेपर लीक, बढ़ते ईंधन मूल्य, महिलाओं के खिलाफ अपराध और बेरोजगारी के विरोध में पार्टी आंदोलन कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में लगातार हत्या और बलात्कार जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं।

लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेता जीतू कश्यप ने कहा कि नीट पेपर लीक से 22 लाख छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में 70 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे युवाओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार महंगाई और बेरोजगारी पर नियंत्रण करने में पूरी तरह विफल रही है और उसे नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।

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