चीन खरीदेगा 200 बोइंग जेट, ट्रंप के ऐलान से वैश्विक विमानन बाजार में हलचल

 वॉशिंगटन/बीजिंग, 15 मई 2026। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि चीन अमेरिका की विमान निर्माता कंपनी Boeing से 200 यात्री विमानों की खरीद पर सहमत हो गया है। पिछले करीब एक दशक में यह पहला बड़ा मौका होगा, जब चीन अमेरिकी निर्मित वाणिज्यिक जेट खरीदने जा रहा है।

हालांकि, इस संभावित सौदे का आधिकारिक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। वहीं खबर सामने आने के बाद बोइंग के शेयरों में चार प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

ट्रंप ने इंटरव्यू में किया खुलासा

फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि चीन 200 “बड़े जेट” खरीदने पर सहमत हुआ है। उन्होंने यह बयान चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ बातचीत के बाद दिया।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चीन कौन से विमान खरीदेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह सौदा सिंगल-आइजल 737 मैक्स, 787 ड्रीमलाइनर या 777एक्स जैसे विमानों से जुड़ा हो सकता है।

बोइंग के शीर्ष अधिकारी भी चीन दौरे में शामिल

बोइंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी केली ऑर्टबर्ग और GE Aerospace के सीईओ लैरी कल्प भी उस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, जो ट्रंप के साथ चीन गया था। इससे संकेत मिलते हैं कि विमान सौदे को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही थी।

उम्मीद से कम निकला ऑर्डर

वर्ष 2017 में ट्रंप की पिछली चीन यात्रा के दौरान बीजिंग ने 300 बोइंग विमानों की खरीद पर सहमति जताई थी। इस बार अमेरिकी उद्योग जगत को कम से कम 500 विमानों के बड़े सौदे की उम्मीद थी। ऐसे में 200 विमानों का संभावित ऑर्डर अपेक्षाओं से काफी कम माना जा रहा है।

एयरबस को मिला था फायदा

अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और 737 मैक्स विमानों से जुड़े विवादों के चलते बोइंग पिछले कुछ वर्षों में चीनी बाजार में पिछड़ गया था। इस दौरान यूरोपीय विमान निर्माता Airbus ने चीन में अपनी पकड़ मजबूत की।

एयरबस ने वर्ष 2008 में तियानजिन में ए320 विमान की असेंबली लाइन शुरू की थी, जिससे उसे चीनी एयरलाइंस के बीच बड़ा लाभ मिला।

चीन को 2045 तक चाहिए हजारों नए विमान

विशेषज्ञों के अनुसार, चीन का विमानन बाजार दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में शामिल है। बोइंग और एयरबस दोनों का अनुमान है कि चीन को वर्ष 2045 तक कम से कम 9,000 नए यात्री विमानों की जरूरत होगी।

विश्लेषकों का कहना है कि चीन केवल एक विमान निर्माता कंपनी पर निर्भर नहीं रह सकता। ऐसे में बोइंग के लिए यह संभावित डील चीनी बाजार में वापसी का महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।

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