लखनऊ, 07 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश में शिक्षा को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक अहम पहल के तहत राजधानी लखनऊ में ‘एआई फॉर एजुकेशन इम्पैक्ट’ स्टेट एक्शन डायलॉग का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रहे शिक्षा सुधार प्रयासों की कड़ी माना जा रहा है।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के निर्देशन में परिषदीय विद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को बढ़ावा देने पर व्यापक चर्चा हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि एआई शिक्षकों का विकल्प नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाने का माध्यम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बदलती दुनिया में एआई को शिक्षा प्रणाली में शामिल करना समय की आवश्यकता है और इसके लिए दीर्घकालिक रणनीति जरूरी है।
वहीं, महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि अब पारंपरिक रटने वाली शिक्षा पद्धति से आगे बढ़ते हुए नवाचार आधारित शिक्षा को अपनाने का समय आ गया है। उन्होंने बताया कि इस पहल से खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को तकनीकी रूप से सशक्त किया जाएगा।
कार्यक्रम में संपर्क फाउंडेशन की अहम भूमिका रही। फाउंडेशन के फाउंडर-चेयरमैन विनीत नायर ने बताया कि एआई आधारित मॉडल के माध्यम से प्रदेश में अब तक 34 लाख से अधिक बच्चों तक पहुंच बनाई जा चुकी है और 19 हजार स्कूलों में एक लाख से ज्यादा शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है।
इसके साथ ही राज्य में 4,700 स्मार्ट कक्षाएं स्थापित की जा चुकी हैं और 6,000 नई स्मार्ट कक्षाएं स्थापित करने की योजना है।
कार्यक्रम में आयोजित पैनल चर्चाओं में शिक्षा प्रणाली में डेटा आधारित मॉनिटरिंग, रियल-टाइम निर्णय और छात्रों की सीखने की क्षमता बढ़ाने में एआई की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के प्रयोग से कक्षा में छात्रों की भागीदारी बढ़ेगी और शिक्षण अधिक प्रभावी होगा।
सरकार की यह पहल न केवल शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त करेगी, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
