रुपया ऐतिहासिक गिरावट पर: 93.53 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद

Rupee remains under pressure due to foreign capital outflows, will...

मुंबई, 20 मार्च (RNN)। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में शुक्रवार को भारतीय रुपया बड़ी गिरावट के साथ अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपया 64 पैसे लुढ़ककर 93.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो इसके इतिहास का न्यूनतम स्तर है।

मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी ने रुपये पर जबरदस्त दबाव बनाया है। निवेशकों में बढ़ती अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के कारण डॉलर की मांग बढ़ी, जिससे रुपये में कमजोरी आई।

कारोबार की शुरुआत में रुपया 92.92 प्रति डॉलर पर खुला, लेकिन दिनभर दबाव में रहने के कारण यह तेजी से गिरकर 93 के स्तर से नीचे पहुंच गया और अंततः 93.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पहले बुधवार को भी रुपया 49 पैसे की गिरावट के साथ 92.89 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था, जो उस समय तक का रिकॉर्ड निचला स्तर था।

विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय हैं। इससे न केवल आयात बिल बढ़ता है, बल्कि व्यापार घाटा और महंगाई का दबाव भी बढ़ता है, जिसका सीधा असर मुद्रा पर पड़ता है।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का रुपये पर ‘दोहरा असर’ पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता अल्पकालिक बाजार धारणा को प्रभावित कर रही है, हालांकि तकनीकी रूप से डॉलर-रुपया अभी मजबूती के संकेत दे रहा है।

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.37 प्रतिशत बढ़कर 99.60 पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जो ऊंचे स्तर पर कायम है।

हालांकि घरेलू शेयर बाजारों ने मजबूती दिखाई। सेंसेक्स 325 अंक चढ़कर 74,532.96 पर और निफ्टी 112 अंक की बढ़त के साथ 23,114.50 पर बंद हुआ।

बाजार आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 5,518 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की, जिससे भी रुपये पर दबाव बढ़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात में सुधार नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो रुपये पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *