नई दिल्ली, 20 मार्च (RNN)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर भारत में भी दिखने लगा है। शुक्रवार को प्रीमियम (उच्च श्रेणी) पेट्रोल की कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई, जबकि औद्योगिक उपयोग वाले थोक डीजल के दाम में करीब 22 रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा हुआ है।
हालांकि राहत की बात यह है कि आम उपभोक्ताओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
उद्योग सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में 95-ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल की कीमत 99.89 रुपये से बढ़ाकर 101.89 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं औद्योगिक डीजल की कीमत 87.67 रुपये से बढ़कर 109.59 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है।
अन्य महानगरों में भी औद्योगिक डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है—
- मुंबई: 90.39 रुपये से बढ़कर 113.11 रुपये प्रति लीटर
- कोलकाता: 92.30 रुपये से बढ़कर 114.27 रुपये प्रति लीटर
- चेन्नई: 92.54 रुपये से बढ़कर 113.38 रुपये प्रति लीटर
औद्योगिक या वाणिज्यिक डीजल का इस्तेमाल टेलीकॉम टावरों और बड़े प्रतिष्ठानों में बिजली आपूर्ति के लिए किया जाता है, इसलिए इस बढ़ोतरी का असर उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि ईरान से जुड़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो बाद में घटकर करीब 108 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि आम जनता के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि प्रीमियम पेट्रोल कुल खपत का केवल 2-4 प्रतिशत हिस्सा है, इसलिए इसका प्रभाव सीमित रहेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रमशः 2010 और 2014 में नियंत्रण मुक्त (डिरेगुलेट) कर दी गई थीं, इसलिए इनके दाम तय करने का अधिकार तेल विपणन कंपनियों के पास है। सरकार सीधे तौर पर कीमतें निर्धारित नहीं करती।
इस बीच इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद कंपनी ने आम ईंधन की कीमतों को स्थिर रखा है और केवल प्रीमियम पेट्रोल (XP-95) में सीमित संशोधन किया गया है।
सरकार फिलहाल वैश्विक तेल बाजार पर नजर बनाए हुए है और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसके लिए तेल कंपनियों से लागत का कुछ हिस्सा स्वयं वहन करने की अपेक्षा की जा रही है।
