जयपुर, 16 मार्च । योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि धर्म समाज को जोड़ने की शक्ति होना चाहिए, जबकि जातिवाद सामाजिक ढांचे को कमजोर कर राष्ट्र को विभाजित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि नशे की तरह स्मार्टफोन का अत्यधिक इस्तेमाल भी बच्चों और युवाओं के लिए हानिकारक है।
राजस्थान के जालोर स्थित सिरे मंदिर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि जाति व्यवस्था समाज को संगठित करने के लिए बनी है, लेकिन जब यह जातिवाद में बदल जाती है तो समाज और राष्ट्र दोनों को नुकसान पहुंचाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारें जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर समाज को बांटने में विश्वास करती थीं, जिसके कारण देश में कश्मीर की अशांति, नक्सलवाद, भाषाई विवाद और जातीय संघर्ष जैसी समस्याएं पैदा हुईं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और मौजूदा शासन में यह सुनिश्चित किया गया है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव के सभी पात्र लोगों तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि सरकार ने देशभर में बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान दिया है। जहां पहले सड़कें नहीं थीं वहां सड़कें बनीं, रेलवे संपर्क बढ़ा, हवाई अड्डे, मेट्रो सेवाएं, चिकित्सा संस्थान और इंजीनियरिंग कॉलेज ऐसे क्षेत्रों में स्थापित किए गए जहां पहले इनकी कमी थी।
योगी ने कहा कि पिछली सरकारों ने भारत की आध्यात्मिक परंपराओं को पिछड़ा समझा, जबकि वर्तमान नेतृत्व ने यह स्वीकार किया कि देश की आस्था सनातन धर्म से गहराई से जुड़ी है और समाज आस्था के बिना आगे नहीं बढ़ सकता।
उन्होंने राम मंदिर के निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दशकों पहले बन सकता था, लेकिन अब यह भव्य रूप में बन रहा है और संकल्प व एकता का प्रतीक है। उन्होंने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के विकास का भी जिक्र किया और कहा कि पहले जहां सीमित संख्या में श्रद्धालु दर्शन कर पाते थे, अब हजारों लोग एक साथ दर्शन कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने दहेज, बहुपत्नी प्रथा और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने का आह्वान करते हुए राष्ट्र की प्रगति के लिए सभी से ईमानदारी से काम करने की अपील की।
योगी आदित्यनाथ ने बच्चों और युवाओं में स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन देखने से आंखों पर असर पड़ता है, दिनचर्या बिगड़ती है और अवसाद की स्थिति पैदा हो सकती है।
उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि बच्चों को स्मार्टफोन देने से बचें और उन्हें पढ़ाई, योग व शारीरिक व्यायाम के लिए प्रेरित करें। योगी ने कहा, “देश का भविष्य युवाओं के हाथ में है। नशा खतरनाक है और स्मार्टफोन भी उतने ही हानिकारक हैं, इसलिए बच्चों को दोनों से बचाना चाहिए।”
उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे स्मार्टफोन का सीमित उपयोग करें, परिवार के साथ अधिक समय बिताएं और भोजन व पूजा के समय फोन से दूर रहें। साथ ही उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता और असफलता दोनों आती हैं, इसलिए असफलता से घबराना नहीं चाहिए।
