ईरान-इजराइल संघर्ष तेज, खाड़ी में बढ़ा तनाव; तेल कीमतें 100 डॉलर के पार

बेरूत/तेहरान/दुबई, 16 मार्च। पश्चिम एशिया में तनाव लगातार गहराता जा रहा है। ईरान पर अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले के दो सप्ताह बाद भी दोनों पक्षों के बीच सैन्य टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को इजराइल ने लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला के ठिकानों पर फिर से भारी बमबारी की, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और तेल अवसंरचना को निशाना बनाने की कोशिश की।

इजराइली सेना ने रविवार देर रात लेबनान की राजधानी बेरूत और दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में हिजबुल्ला से जुड़े ठिकानों पर हमले किए। इसके साथ ही इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान पर भी नए सिरे से हमले शुरू कर दिए। हमलों के बाद बेरूत में कई भीषण विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। अब तक लेबनान में इजराइली सैन्य अभियान के कारण आठ लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं।

इधर, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी को प्रभावी रूप से बाधित कर दिया है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है। इसके चलते वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंकाएं बढ़ गई हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमत करीब 104 डॉलर प्रति बैरल रही, जो 28 फरवरी के बाद लगभग 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाती है।

इस बीच दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास सोमवार तड़के एक ईरानी ड्रोन द्वारा ईंधन टैंक को निशाना बनाए जाने से भीषण आग लग गई। हालांकि दमकलकर्मियों ने जल्द ही आग पर काबू पा लिया और किसी के घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर कुछ घंटों के लिए हवाई अड्डे से उड़ान संचालन रोकना पड़ा।

संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी सेनाएं ईरानी मिसाइलों और ड्रोन के संभावित नए हमलों को रोकने के लिए सक्रिय हैं। वहीं सऊदी अरब ने भी दावा किया कि उसने देश के पूर्वी हिस्से में ईरान के 35 ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया। यह इलाका प्रमुख तेल प्रतिष्ठानों के लिए जाना जाता है।

उधर, इजराइली सेना का कहना है कि ईरान उसकी ओर भी मिसाइलें दाग रहा है और क्लस्टर बमों का इस्तेमाल कर रहा है, जो हवाई सुरक्षा प्रणालियों को चकमा दे सकते हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए कई देशों से युद्धपोत भेजने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लगभग सात देशों से इस बारे में सहयोग मांगा गया है, हालांकि अभी तक किसी देश ने ठोस प्रतिबद्धता नहीं जताई है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि बढ़ती तेल कीमतें अमेरिकी उपभोक्ताओं पर असर डाल सकती हैं और इसका राजनीतिक प्रभाव भी पड़ सकता है।

इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान फिलहाल न तो युद्धविराम चाहता है और न ही बातचीत के जरिए संघर्ष खत्म करने का इच्छुक है। उन्होंने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं तब तक जवाबी कार्रवाई जारी रखेंगी जब तक अमेरिका को यह एहसास नहीं हो जाता कि वह एक अवैध युद्ध थोप रहा है।

यूरोपीय संघ ने भी स्थिति पर चिंता जताई है। ब्रसेल्स में होने वाली बैठक से पहले यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने संकेत दिया कि लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा के लिए चल रहे ‘एस्पाइड्स’ नौसैनिक मिशन को होर्मुज जलडमरूमध्य तक बढ़ाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।

उधर जापान ने कहा कि उसे अमेरिका की ओर से औपचारिक रूप से कोई अनुरोध नहीं मिला है, लेकिन वह अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए विकल्पों पर विचार कर रहा है। जापान अपनी 90 प्रतिशत से अधिक तेल जरूरतें पश्चिम एशिया से पूरी करता है।

लगातार बढ़ते हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच पश्चिम एशिया में युद्ध के और फैलने की आशंका बढ़ गई है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।

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