नेपाल में कड़ी सुरक्षा के बीच आम चुनाव के लिए मतदान शुरू, 1.90 करोड़ मतदाता चुनेंगे नई सरकार

नेपाल, 5 मार्च 2026- पड़ोसी देश नेपाल में गुरुवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आम चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। सुबह सात बजे से ही बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केंद्रों पर पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। यह चुनाव पिछले साल सितंबर में हुए युवाओं के नेतृत्व वाले जेन-जेड आंदोलन के बाद देश का पहला बड़ा चुनाव माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि इस चुनाव में करीब 1.90 करोड़ मतदाता 275 सदस्यीय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के गठन के लिए वोट डालेंगे। मतदान सुबह 7 बजे शुरू होकर शाम 5 बजे तक चलेगा। चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए तीन लाख से अधिक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।

पिछले वर्ष भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सरकारी जवाबदेही की मांग को लेकर हुए जेन-जेड आंदोलन के दौरान व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार गिर गई थी। उसी राजनीतिक घटनाक्रम के बाद यह चुनाव कराया जा रहा है।

इस बार चुनाव मैदान में कई नए और युवा चेहरे भी उतरे हैं। काठमांडू के पूर्व मेयर और रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह (बालेन शाह) भी प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। उन्होंने अपने मतदान केंद्र पर वोट डालकर युवाओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री पद की दौड़ में उनका नाम भी प्रमुख रूप से लिया जा रहा है और वे पूर्व प्रधानमंत्री ओली को कड़ी चुनौती दे रहे हैं।

इसके अलावा गगन थापा और पुष्प कमल दहल (प्रचंड) भी प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। चुनाव में कुल 3,400 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 1,000 से ज्यादा उम्मीदवार 40 वर्ष से कम उम्र के हैं। इससे साफ है कि इस बार का चुनाव युवा बनाम पारंपरिक राजनीतिक दलों के बीच बड़ा मुकाबला माना जा रहा है।

चुनाव आयोग के अनुसार 165 सीटों के लिए प्रत्यक्ष मतदान और 110 सीटों के लिए समानुपातिक प्रणाली से चुनाव हो रहा है। मतदान समाप्त होने के बाद बैलेट बॉक्स जमा होते ही मतगणना शुरू कर दी जाएगी। प्रत्यक्ष सीटों के नतीजे 24 घंटे के भीतर आने की उम्मीद है, हालांकि पहाड़ी इलाकों से मतपेटियां लाने में समय लग सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव नेपाल की राजनीति में बदलाव की दिशा तय करेगा, क्योंकि जेन-जेड आंदोलन के बाद युवाओं में पारदर्शिता, रोजगार और जवाबदेही की मांग काफी तेज हुई है।

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