नयी दिल्ली। द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि महिला सशक्तीकरण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का सामूहिक कर्तव्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक देश की आधी आबादी पूरी तरह सशक्त नहीं होगी, तब तक 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रीय राजधानी में इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित “सशक्त नारी, समृद्ध दिल्ली” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज महिलाएं सेना, विज्ञान, खेल, राजनीति, प्रशासन और व्यापार जैसे विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें हिंसा, आर्थिक असमानता, सामाजिक उपेक्षा और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिन्हें दूर करना समाज की साझा जिम्मेदारी है।
राष्ट्रपति ने स्त्री और पुरुष को जीवन रूपी रथ के दो पहिए बताते हुए कहा कि दोनों के समान रूप से सशक्त होने पर ही राष्ट्र प्रगति कर सकता है। इस अवसर पर महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं की शुरुआत की गई, जिनमें ‘मेरी पूंजी, मेरा अधिकार’, ‘सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड’ और ‘दिल्ली लखपति बिटिया योजना’ प्रमुख हैं। इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराना और बालिकाओं की शिक्षा व भविष्य को मजबूत करना है।
कार्यक्रम में दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने कहा कि सशक्तीकरण केवल आर्थिक मजबूती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समान अवसर, सुरक्षा, सम्मान और सामुदायिक सहभागिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिला-केंद्रित योजनाओं को सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बताया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ये योजनाएं केवल सरकारी पहल नहीं, बल्कि नारी सम्मान और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का संकल्प हैं। उन्होंने बताया कि ‘लाडली’ योजना के अंतर्गत हजारों बालिकाओं के खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से बड़ी राशि हस्तांतरित की गई है, जिससे उनकी शिक्षा और भविष्य को आर्थिक आधार मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘नारी शक्ति वंदन’ के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर महिला सशक्तीकरण को नीति के केंद्र में रखा गया है। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को सुरक्षित वातावरण, समान अवसर और आत्मनिर्भर जीवन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है।
राष्ट्रपति ने अंत में नागरिकों से महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा तथा आत्मविश्वास प्रदान करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन पहलों से महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और समृद्ध समाज के निर्माण को नई दिशा मिलेगी।
