पंजाब में धर्मांतरण के मुद्दे पर अमित शाह की चिंता, राज्य सरकार से कार्रवाई की अपील

नवी मुंबई, 1 मार्च: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि पंजाब में धर्मांतरण की घटनाएं हो रही हैं और उन्होंने राज्य सरकार तथा समाज से इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। शाह नवी मुंबई के खारघर में गुरु तेग बहादुर की 350वीं बरसी के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिंद-दी-चादर’ स्मृति कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

अपने संबोधन में शाह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर का जीवन और बलिदान धार्मिक स्वतंत्रता तथा मानवीय मूल्यों की रक्षा का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि गुरु ने दूसरों के धर्म की रक्षा के लिए स्वयं को बलिदान कर दिया और अत्याचारों के सामने कभी झुके नहीं। शाह ने कहा कि यदि समाज लालच या दबाव के कारण धर्म परिवर्तन की घटनाओं को स्वीकार करता है, तो यह गुरु परंपरा की शिक्षाओं के विपरीत है।

गृह मंत्री ने पंजाब सरकार, समाज और सभी धर्मों के लोगों से मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान भारतीय परंपरा का मूल तत्व है और इसे किसी भी प्रकार के प्रलोभन या दबाव से प्रभावित नहीं होने दिया जाना चाहिए।

शाह ने अपने संबोधन में सिख गुरु परंपरा के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरुओं ने समाज को अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा दी। उन्होंने गुरु नानक देव की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि नाम जपना, कीर्तन और लंगर जैसी परंपराओं ने समाज में समानता, सेवा और एकता की भावना को मजबूत किया।

उन्होंने मुगल काल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में धार्मिक दमन के विरुद्ध खड़े होने की नैतिक शक्ति सिख गुरु परंपरा से ही समाज को मिली। शाह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर के बलिदान ने लोगों में अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने का साहस जगाया और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए नई चेतना पैदा की।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया और गुरु तेग बहादुर को श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि गुरु का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जब समाज को सहिष्णुता, आपसी सम्मान और एकजुटता की आवश्यकता है।

शाह ने अंत में कहा कि सिख गुरुओं द्वारा स्थापित आदर्श न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के लिए मार्गदर्शक हैं और उनके बलिदान से प्रेरणा लेकर समाज को एकता और सद्भाव की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

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