श्रीनगर/लखनऊ, 1 मार्च: अयातुल्ला अली खामेनेई की तेहरान में हवाई हमले में मौत की खबर की पुष्टि के बाद भारत के कई हिस्सों में शिया समुदाय के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किए और शोक व्यक्त किया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, संयुक्त अमेरिका-इजराइल हमलों के दौरान यह घटना हुई, जिसके बाद देश-दुनिया में प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।
कश्मीर घाटी के श्रीनगर सहित लाल चौक, सैदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने सीना पीटकर मातम किया और नारे लगाए। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए सभी समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि राज्य सरकार विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय में ईरान में मौजूद नागरिकों की सुरक्षा पर नजर रखे हुए है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने भी घटना को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर बताया और प्रशासन से संवेदनशीलता के साथ स्थिति संभालने को कहा। कश्मीर के धार्मिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने इसे “मुस्लिम जगत को झकझोर देने वाली” घटना बताते हुए कड़ी निंदा की।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बड़ा इमामबाड़ा क्षेत्र के पास बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के पदाधिकारियों ने तीन दिन के शोक की घोषणा की और सोमवार को विरोध-प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पुतले जलाने की बात कही गई।
पंजाब के लुधियाना, राजस्थान के अजमेर और अन्य शहरों में भी शोक सभाएं आयोजित की गईं। कई स्थानों पर दुकानों को स्वेच्छा से बंद रखा गया और काले झंडे लगाए गए।
इस बीच, दुबई और अबू धाबी के पास उड़ानें रद्द होने से जोधपुर के कुछ श्रद्धालु वहीं फंसे बताए गए हैं।
प्रशासन ने विभिन्न राज्यों में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी है, जबकि कई संगठनों ने आने वाले दिनों में भी शांतिपूर्ण विरोध जारी रखने की घोषणा की है।
