गिरफ्तारी से पहले मजिस्ट्रेट को दिखाए जाएं दस्तावेजी सबूत: कपिल सिब्बल

नयी दिल्ली में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा कि अदालत सरकार को निर्देश दे कि किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी तभी की जाए जब मजिस्ट्रेट के समक्ष मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में कानून का उपयोग विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।

सिब्बल की यह टिप्पणी अरविंद केजरीवाल को कथित शराब नीति मामले में आरोपमुक्त किए जाने के एक दिन बाद आई। उन्होंने कहा कि पहले गिरफ्तारी और बाद में सबूत जुटाने की प्रवृत्ति औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाती है और इससे व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित होती है।

संवाददाता सम्मेलन में सिब्बल ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक जेल में रहता है और बाद में आरोप साबित नहीं होते, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियां कथित तौर पर एक पैटर्न का पालन करती हैं, जिसमें पहले गिरफ्तारी होती है और बाद में अन्य लोगों को आरोपित करने के लिए बयान दर्ज कराए जाते हैं।

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है। सिब्बल ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह आवश्यक है कि किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता केवल ठोस और प्रमाणित साक्ष्यों के आधार पर ही सीमित की जाए।

उन्होंने न्यायपालिका से भी अपील की कि बिना दस्तावेजी साक्ष्य के केवल मौखिक आरोपों के आधार पर अभियोजन की अनुमति न दी जाए। उनके अनुसार, कानून में संशोधन कर ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिसमें गिरफ्तारी से पहले न्यायिक जांच की स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित हो।

सिब्बल ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही और विधि का शासन सर्वोपरि है, इसलिए सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया न्यायसंगत, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित हो।

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