प्रधानमंत्री मोदी ने साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी के सेमीकंडक्टर संयंत्र का उद्घाटन किया

साणंद (गुजरात) में सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने माइक्रोन टेक्नोलॉजी के एटीएमपी (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) संयंत्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सॉफ्टवेयर में अपनी वैश्विक पहचान स्थापित करने के बाद अब भारत हार्डवेयर क्षेत्र में भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है और सेमीकंडक्टर उद्योग देश के तकनीकी भविष्य की आधारशिला बनेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संयंत्र भारत और अमेरिका के बीच मजबूत तकनीकी साझेदारी का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया के सामने यह संदेश स्पष्ट है कि भारत सक्षम, प्रतिस्पर्धी और प्रतिबद्ध राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने सेमीकंडक्टर को 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण घटक बताते हुए कहा कि यदि पिछली सदी में तेल की अहमियत थी, तो इस सदी की दिशा माइक्रोचिप्स तय करेंगे।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्रांति के बाद अब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की क्रांति के दौर में प्रवेश कर चुकी है और सेमीकंडक्टर इस परिवर्तन का सेतु हैं। छोटी सी चिप उद्योग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और एआई आधारित नवाचारों को जोड़ने का कार्य करती है। इसी दृष्टिकोण से भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान ही सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत कर दी थी, जिसके परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि ‘सेमीकॉन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत अब तक कई परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है और देश के विभिन्न राज्यों में सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, असम, ओडिशा और पंजाब सहित कई राज्यों में इस क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ हो चुका है, जिससे रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।

उन्होंने हाल ही में घोषित ‘भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ेगा, देश में सामग्री, घटकों और तकनीकी सेवाओं की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सरकारी जानकारी के अनुसार इस संयंत्र में एसएसडी स्टोरेज उपकरणों के साथ डीरैम और एनएएनडी उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। परियोजना में हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिससे क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि साणंद पहले भी औद्योगिक विकास का केंद्र रहा है और अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र में यह नया औद्योगिक परिवेश तैयार करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना भारत को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर और अधिक सशक्त बनाएगी।

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